
भोपाल। कटनी की रहने वाली अर्चना तिवारी की गुमशुदगी ने पूरे प्रदेश को चौंका दिया था। 12 दिनों तक लापता रहने के बाद 19 अगस्त को उसे उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी, नेपाल बॉर्डर के पास से सकुशल बरामद किया गया। अब पुलिस जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। भोपाल रेलवे एसपी राहुल कुमार लोढ़ा के अनुसार, अर्चना ने खुद अपनी गुमशुदगी की योजना बनाई थी। परिवार शादी का दबाव बना रहा था और उसका रिश्ता एक पटवारी से तय किया गया था, जिससे अर्चना खुश नहीं थी। इसी से बचने के लिए उसने नेपाल तक पहुंचने की साजिश रची।
शादी से बचने के लिए बनाया प्लान
पुलिस जांच में सामने आया कि अर्चना को पढ़ाई छोड़कर शादी के लिए मजबूर किया जा रहा था। इस बीच इंदौर में उसकी मुलाकात सारांश नाम के युवक से हुई। सारांश और तेजिंदर नाम के ड्राइवर की मदद से उसने 6 अगस्त को हरदा स्टेशन पर ट्रेन से गायब होने का नाटक रचा।
ट्रेन में किया गुमराह करने का खेल
प्लान के अनुसार, तेजिंदर ने इटारसी तक अर्चना का साथ दिया और उसके कपड़े व मोबाइल लेकर मिडघाट के जंगल में फेंक दिए। अर्चना जानती थी कि ट्रेन से गायब होने पर GRP गहन जांच नहीं करती। इसी वजह से उसने ये तरीका चुना।
नेपाल तक की यात्रा बिना CCTV में आए
उधर, सारांश कार से इटारसी पहुंचा और अर्चना को लेकर रवाना हुआ। दोनों ने टोल और CCTV से बचने वाला रास्ता चुना। वे शुजालपुर से बुरहानपुर, फिर हैदराबाद, जोधपुर, दिल्ली और अंततः नेपाल पहुंचे। यात्रा के दौरान अर्चना कार की सीट पर लेटी रही ताकि कैमरों में न आए।
नेपाल में छोड़ा, खुद लौट आया सारांश
नेपाल पहुंचकर सारांश ने अर्चना को छोड़ दिया और खुद शुजालपुर लौट आया। अर्चना ने पहले ही 10 दिन पहले मोबाइल इस्तेमाल करना बंद कर दिया था और नया सिम भी मध्य प्रदेश से नहीं लिया। इस तरह उसने अपनी कानूनी समझ से पुलिस को गुमराह किया।
पुलिस कांस्टेबल की भूमिका नहीं
जांच में ग्वालियर के कांस्टेबल राम तोमर का नाम भी सामने आया, जिसने अर्चना का टिकट बुक किया था। हालांकि GRP ने साफ किया है कि उसकी गुमशुदगी की साजिश में कांस्टेबल की कोई भूमिका नहीं थी।