Magh Mela 2026: प्रयागराज के पावन त्रिवेणी संगम पर माघ मेला 2026 की दिव्य लीला प्रारंभ हो चुकी है। कड़ाके की सर्दी में भी आस्था की अग्नि प्रज्वलित है, और भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा है। जैसे ही पुष्पा (एक प्रसिद्ध संत या लोकप्रिय आकृति के रूप में चर्चित) की भव्य एंट्री हुई, पूरा मेला क्षेत्र गूंज उठा। उन्होंने दृढ़ स्वर में घोषणा की—"झुकेगा नहीं!" यह वचन केवल शब्द नहीं, बल्कि आत्मा की अटूट श्रद्धा का प्रतीक था, जो हर श्रद्धालु के हृदय को स्पर्श कर गया।
ब्रह्म मुहूर्त से ही लाखों भक्तों ने लगाई डुबकी
संगम की लहरें मानो स्वयं भगवान शिव की जटाओं से उतरती अमृत-धारा बन गईं। ब्रह्म मुहूर्त से ही लाखों भक्त पवित्र डुबकी लगाने को आतुर थे। प्रशासन के अनुसार, पहले प्रमुख स्नान पर्व पर लगभग 40 लाख श्रद्धालुओं ने गंगा-यमुना और अदृश्य सरस्वती के मिलन स्थल पर आस्था की डुबकी लगाई। यह संख्या केवल आंकड़ा नहीं, अपितु उस अनंत भक्ति की गवाही है जो पापों को धोकर आत्मा को शुद्ध करने का संकल्प लेकर आई है। शास्त्रों में वर्णित है कि माघ मास में संगम स्नान सहस्रों अश्वमेध यज्ञों के समान पुण्य प्रदान करता है, और आज यह पुण्य लाखों आत्माओं पर बरस रहा है।
30 किलो का रूद्राक्ष पहने पधारे बाबा
इस बीच एक दृश्य विशेष रूप से मन को मोह लेने वाला था। एक महान साधु बाबा, जिन्होंने अपने कंठ में 30 किलो का विशाल रुद्राक्ष धारण किया हुआ था, मेला क्षेत्र में पधारे। यह रुद्राक्ष नहीं, बल्कि भगवान शिव का प्रत्यक्ष आशीर्वाद था। प्रत्येक मणि में ओम की ध्वनि गूंज रही थी, और बाबा का वह रूप देखकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। वे मानो कह रहे थे—"शिव ही सत्य है, शिव ही शाश्वत है।" उनके दर्शन मात्र से ही भक्तों के मन में शांति की लहर दौड़ गई, और वे भी अपने भीतर के शिव को जागृत करने को प्रेरित हुए।
साधना में लीन हैं संगम तट पर कल्पवासी
संगम तट पर कल्पवासी अपनी साधना में लीन हैं। सूर्योदय के साथ स्नान, ध्यान, जप और दान का यह क्रम अनवरत चल रहा है। ठंडी हवाओं में भी भक्ति की गर्मी इतनी है कि शरीर कांपता है, किंतु आत्मा निश्चल रहती है। प्रशासन ने कुंभ स्तर की व्यवस्थाएं की हैं पुल, घाट, सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं सब कुछ इस तरह कि हर भक्त को केवल भगवान के चिंतन का अवकाश मिले।
पुष्पा की एंट्री और "झुकेगा नहीं"
यह मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, अपितु आत्म-जागरण का महापर्व है। यहां हर डुबकी में पाप बह जाते हैं, हर नमन में नई ऊर्जा का संचार होता है। पुष्पा की यह एंट्री और "झुकेगा नहीं" का नारा हमें सिखाता है कि सच्ची श्रद्धा कभी झुकती नहीं, बल्कि वह तो उन्नति की ओर बढ़ती रहती है।हे भक्तों! संगम बुला रहा है। आओ, इस पवित्र माघ में डुबकी लगाकर जीवन को धन्य बनाएं।