नासा के मिशन आर्टेमिस II ने युवाओं में अंतरिक्ष यात्री बनने की उत्सुकता को बढ़ा दिया है। हालांकि एस्ट्रोनॉट बनना आसान नहीं पर अगर आप इस क्षेत्र में जाना चाहते हैं तो ये जानकारी आपके लिए बेहद जरुरी है। आइए आपको बताते हैं क्या है यह मिशन और कौनसी शिक्षा, ट्रेनिंग और संस्थान से जुड़ने के बाद आप एस्ट्रोनॉट बन सकते हैं।
आर्टेमिस II मिशन
यह मिशन अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA के आर्टेमिस प्रोग्राम का हिस्सा है जो भविष्य में चांद और मंगल ग्रह पर किए जाने वाले मिशनों की तैयारी का पहला चरण है। आर्टिमिस II मिशन में इंसान को चांद के पास भेजा जाएगा, पर उसे वहां लैंड नहीं कराया जाएगा बल्कि चांद के पास केवल उड़ान ही भरी जाएगी। इस मिशन में 4 अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं जो लगभग 10 दिन तक चांद के चारों ओर चक्कर लगाएंगे। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य है स्पेसक्राफ्ट और क्रू सपोर्ट सिस्टम की सुरक्षा और तकनीक की जांच करना। करीब 50 साल बाद इंसानों को इस मिशन के द्वारा फिर से चांद के पास भेजा गया है जिसके बाद उन्हें धरती पर वापसी कराई जाएगी।
ऐसे बनें एस्ट्रोनॉट
1. साइंस स्ट्रीम से 12वीं पास करके इंजीनियरिंग या फिजिक्स जैसे विषय में ग्रेजुएशन करें।
2. मास्टर्स या PhD करके संबंधित क्षेत्र में एक्सपीरियंस हासिल करें।
3. अंत में किसी स्पेस एजेंसी की चयन प्रक्रिया को पास करने के बाद आप एस्ट्रोनॉट बन सकते हैं।
आवश्यक शिक्षा, ट्रेनिंग और स्किल्स
एस्ट्रोनॉट की कोई एक डिग्री नहीं होती, बल्कि अलग-अलग कोर्स और ट्रेनिंग मिलकर अहम भूमिका निभाते हैं। एयरोस्पेस इंजीनियरिंग, फिजिक्स, गणित, कंप्यूटर साइंस, स्पेस साइंस, रॉकेट साइंस, की पढ़ाई के साथ पायलेट या टेक्निकल ट्रेनिंग, स्पेस मिशन सिम्युलेशन जैसी ट्रेनिंग भी एस्ट्रोनॉट बनने के लिए जरुरी है। हालांकि साइंस और मैथ्स में मजबूत पकड़ के साथ बीएससी / बीई / बीटेक में बैचलर डिग्री, एमएससी / एमटेक में मास्टर डिग्री और कई मामलों में PhD भी एस्ट्रोनॉट बनने के लिए जरुरी हैं। फिजिकल फिटनेस, टीमवर्क, लीडरशिप, कठिन परिस्थितियों में काम करने और समस्या हल करने की क्षमता आदि स्किल्स भी एस्ट्रोनॉट बनने के लिए महत्वपूर्ण हैं। कई अंतरिक्ष यात्री पहले पायलट या सेना में अधिकारी रहने के बाद एस्ट्रोनॉट बनते हैं।
प्रमुख संस्थान
यदी आप एस्ट्रोनॉट बनना चाहते हैं तो आप भारत की इन प्रमुख संस्थान से अपनी पढ़ाई और ट्रेनिंग कर सकते हैं। भारत की प्रमुख अंतरिक्ष एजेंसी इसरो वैज्ञानिकों को ट्रेनिंग देती है और उन्हें अंतरिक्ष मिशन के लिए तैयार करती है। साथ ही भारत की ही कुछ प्रतिष्ठित IITs भी एयरोस्पेस इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस और फिजिक्स में ऐसे छात्रों को उच्च शिक्षा कराती हैं जो इस क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हैं।