
देश में पहली बार जयपुर में मंगलवार से आर्टिफिशल रेन का प्रोसेज शुरू हुआ। जयपुर में ये कृत्रिम बारिश ऐतिहासिक रामगढ़ बांध पर करवाई जाएगी। यहां पर करीब दो दशक से सूखा पड़ा है। जयपुर जिले के जमवारामगढ़ क्षेत्र के रामगढ़ बांध पर आर्टिफिशल रेन को देखने के लिए भारी भीड़ पहुंची। देश में ऐसा पहला मौका था, जब ड्रोन और एआई तकनीक से आर्टिफिशल रेन होनी थी। इसके लिए 60 दिवसयी प्रोसेज से पहले यहां ड्रोन की पूजा भी की गई। मंत्रोचारण का ध्यान रखा गया।
ऐतिहासिक पहल मानी जा रही
राजस्थान सरकार और निजी कंपनी की ओर से जयपुर के रामगढ़ बांध पर होने वाली कृत्रिम बारिश को लेकर मंगलवार को क़ृषि मंत्री डॉ किरोड़ीलाल मीणा मौके पर पहुंचे। यहां पर सिविल एविएशन की परमिशन ना होने के चलते और बादलों के अधिक हाइट पर होने के चलते आर्टिफिशल रेन नहीं हो पाई। हालांकि अब 60 दिन तक पायलट प्रोजेक्ट के तहत आर्टिफिशल रेन का प्रोसेज जारी रहने वाला है। इसमें हजारों फ़ीट की ऊंचाई पर ड्रोन की मदद से बादलों में सोडियम क्लोराइड का छिड़काव होगा। रामगढ़ बांध को क्लाउड सीडिंग तकनीक से भरने के लिए यह ऐतिहासिक पहल मानी जा रही है।
इसे ड्रोन के जरिए पूरा किया जाएगा
देश में पहली बार ड्रोन और AI तकनीक के माध्यम से कृत्रिम बारिश करवाई जाएगी। हजारों फीट ऊंचाई पर ड्रोन को उड़ाकर बादलों में सोडियम क्लोराइड डाला जाएगा। इससे संघनन की प्रक्रिया से वर्षा के लिए अनुकूल जल बूंदें बनेंगी और कृत्रिम बरसात हो सकेगी. यह तकनीक अब तक विमान आधारित रही है। मगर रामगढ़ पर इसे ड्रोन के जरिए पूरा किया जाएगा। अमेरिका और बेंगलुरु की टेक्नोलॉजी बेस्ड एआई कंपनी सरकार के साथ मिलकर पायलट प्रोजेक्ट के तहत यह ट्रायल कर रही है। रामगढ़ में 60 क्लाउड सीडिंग की टेस्ट ड्राइव करवाई जाएगी।अब तक प्लेन से क्लाउड सीडिंग करवाई जाती रही है। देश में ड्रोन से छोटे इलाके के सीमित दायरे में होने वाला यह पहला प्रयोग है।