
दिल्ली में कृत्रिम बारिश पाइरोटेक्निक प्रक्रिया के जरिए हो सकेगी। इसमें फ्लेयर्स (रसायन वाली बत्तियां) बादलों के साथ क्रिया करके बरसात शुरू करेंगी। इस प्रक्रिया के तहत सेना का विमान उपयोग किया जाएगा। इसमें आठ से 10 पैकेट होंगे। ये केमिकल्स से भरे होंगे। विमान में मौजूद बटन दबाकर इन पैकेट में रखे केमिकल्स को बादलों के नीचे ब्लास्ट किया जाएगा। इससे बारिश शुरू हो जाएगी।
दिल्ली में अगले 3 दिनों में कभी भी कृत्रिम बारिश होने की संभावना है। दिल्ली सरकार ने इसके लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। विशेष विमान सेसना एयरक्राफ्ट मेरठ में तैयार है। कृत्रिम बारिश कराने को मौसम विभाग की मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है।
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कृत्रिम बरसात की जरूरी शर्तें
कृत्रिम बारिश के लिए उपयुक्त बादलों की जरूरत होगी। इसके लिए मौसम विभाग की मंजूरी और अनुकूल मौसम के हालात आवश्यक है।
कृत्रिम बारिश का प्रभाव
कृत्रिम बारिश की अनुमति प्रभाव क्षेत्र से करीब 100 किलोमीटर होगा। इससे दिल्ली-एनसीआर के प्रदूषण में भारी कमी आने की उम्मीद है।
दिल्ली-NCR में प्रदूषण का स्तर बढ़ा
दिल्ली में प्रदूषण का स्तर काफी खराब हालात में है। आनंद विहार में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 429 तक पहुंच चुका है। वहीं पूरे शहर का औसत AQI 332 है। नोएडा में भी AQI 330 के पार पहुंच चुका है। प्रदूषण के कारण सांस लेने में परेशानी और आंखों में जलन की समस्या देखी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण का स्तर अभी और बढ़ने की संभावना है। यह अक्सर ठंड के मौसम में देखा गया है। दिल्ली सरकार ने प्रदूषण को काबू करने के लिए कई तरह के कदम उठाए हैं।