Artificial Sweeteners Brain Health : कैलोरी कम करने और चीनी से बचने के लिए आजकल कई लोग कृत्रिम मिठास यानी आर्टिफिशियल स्वीटनर्स का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन हाल ही में प्रकाशित एक अध्ययन ने इनके लंबे समय तक सेवन और दिमाग की कार्यक्षमता के बीच संभावित संबंध को लेकर चिंता बढ़ाई है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, कुछ कम और बिना कैलोरी वाले स्वीटनर्स का अधिक सेवन याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता में तेजी से गिरावट से जुड़ा पाया गया।
8 साल तक 12 हजार से ज्यादा लोगों पर नजर
इस अध्ययन में ब्राजील के 12,772 लोगों को शामिल किया गया। प्रतिभागियों की औसत उम्र करीब 52 वर्ष थी और उनका लगभग आठ वर्षों तक अध्ययन किया गया। शोधकर्ताओं ने भोजन संबंधी जानकारी और अलग-अलग संज्ञानात्मक परीक्षणों के आधार पर यह समझने की कोशिश की कि कम और बिना कैलोरी वाले स्वीटनर्स का सेवन दिमागी क्षमता में बदलाव से किस तरह जुड़ा है।
किन स्वीटनर्स पर उठे सवाल?
अध्ययन में एस्पार्टेम, सैकरीन, एसेसल्फेम-के, एरिथ्रिटोल, सोर्बिटोल, जाइलिटोल और टैगाटोज जैसे सात स्वीटनर्स को देखा गया। इनमें से एस्पार्टेम, सैकरीन, एसेसल्फेम-के, एरिथ्रिटोल, सोर्बिटोल और जाइलिटोल का सेवन तेज संज्ञानात्मक गिरावट से जुड़ा पाया गया। खास तौर पर याददाश्त और शब्दों को तेजी से याद करने या बोलने जैसी क्षमताओं में बदलाव देखा गया।
क्या इससे दिमाग तेजी से बूढ़ा होता है?
शोध में ज्यादा मात्रा में स्वीटनर्स लेने वाले 60 वर्ष से कम उम्र के लोगों में सोचने और समझने की क्षमता में अपेक्षाकृत तेज गिरावट देखी गई। हालांकि, वैज्ञानिकों ने यह साबित नहीं किया है कि स्वीटनर्स सीधे तौर पर दिमाग को बूढ़ा करते हैं। यह अध्ययन मुख्य रूप से संबंध दिखाता है, कारण और प्रभाव साबित नहीं करता। शोधकर्ताओं ने खुद माना कि खान-पान से जुड़ी स्वयं बताई गई जानकारी और अन्य स्वास्थ्य संबंधी कारक परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं।
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तो क्या स्वीटनर्स पूरी तरह छोड़ दें?
सिर्फ इस अध्ययन के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि हर व्यक्ति को कृत्रिम मिठास पूरी तरह बंद कर देनी चाहिए। हालांकि, रोजाना बड़ी मात्रा में इनका सेवन करने वालों के लिए मात्रा पर ध्यान देना समझदारी हो सकती है। संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, नियमित शारीरिक गतिविधि और कम प्रसंस्कृत भोजन दिमाग की सेहत के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण आधार माने जाते हैं। कुल मिलाकर, यह रिसर्च कृत्रिम मिठास और दिमागी स्वास्थ्य के बीच एक संभावित संबंध की ओर इशारा करती है, लेकिन इस संबंध को पूरी तरह समझने के लिए अभी और शोध की जरूरत है।