नाबालिग से रेप के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। अदालत ने साफ कहा कि इस समय जमानत नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने पहले राजस्थान सरकार का पक्ष सुनने का फैसला किया है और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। अब अगली सुनवाई में दोनों पक्षों की दलीलों के बाद आगे का फैसला होगा।
कोर्ट ने क्यों जताई सावधानी?
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जमानत पर फैसला करते समय सभी पहलुओं पर विचार करना जरूरी है। अदालत ने यह भी कहा कि आसाराम एक प्रभावशाली व्यक्ति हैं, इसलिए मामले को पूरी सावधानी से देखा जाएगा। इसी वजह से बिना राज्य सरकार की बात सुने अंतरिम राहत देने से अदालत ने इनकार कर दिया।
स्वास्थ्य के आधार पर मांगी थी जमानत
आसाराम की ओर से उनके वकील ने दलील दी कि उनकी उम्र 80 साल से ज्यादा है और वे कई बीमारियों से जूझ रहे हैं। इसी आधार पर अंतरिम जमानत की मांग की गई थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिर्फ गंभीर और जानलेवा मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में ही राहत पर विचार किया जा सकता है। अदालत ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि जेल में उन्हें जरूरी चिकित्सा सुविधाएं मिलती रहें।
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राजस्थान सरकार ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि हाल ही में आसाराम को अस्पताल ले जाया गया था और उनकी स्वास्थ्य स्थिति फिलहाल स्थिर है। इसी आधार पर सरकार ने तत्काल राहत की जरूरत से इनकार किया। अब इस मामले में विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए राजस्थान सरकार को नोटिस जारी किया गया है।
हाई कोर्ट के फैसले को दी है चुनौती
आसाराम ने राजस्थान हाई कोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें उनकी उम्रकैद की सजा बरकरार रखी गई थी। हालांकि हाई कोर्ट ने गैंगरेप और POCSO की कुछ धाराओं से उन्हें राहत दी थी, लेकिन रेप के मामले में दोष सिद्ध मानते हुए उम्रकैद की सजा कायम रखी थी। इसी फैसले के खिलाफ अब सुप्रीम कोर्ट में अपील लंबित है।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि तुरंत जमानत नहीं दी जाएगी। अगली सुनवाई में राजस्थान सरकार का जवाब आने के बाद ही अदालत आगे का फैसला करेगी। तब तक आसाराम जेल में ही रहेंगे और उनकी चिकित्सा सुविधाएं जारी रखने के निर्देश प्रभावी रहेंगे।