
मेरठ की रहने वाली आशा नेगी का नाम एक बार फिर चर्चा में है. साल 2019 में लापता हुई आशा का मामला अब दोबारा गंभीरता से लिया जा रहा है. आशा के परिवार का आरोप है कि वह कुख्यात छांगुर बाबा धर्मांतरण गैंग के जाल में फंस गई थी. अब मेरठ पुलिस ने नोएडा और मेरठ में छापेमारी शुरू कर दी है और इस केस में तेजी से जांच चल रही है.
क्या है पूरा मामला?
आशा नेगी मेरठ के पांडव नगर की रहने वाली थी. उसका संपर्क एक व्यक्ति बदर अख्तर सिद्दीकी से हुआ, जो बाद में उसे अपने साथ नोएडा सेक्टर-63 ले गया. आशा के भाई सुनील नेगी का दावा है कि बदर ने पहले आशा का धर्म परिवर्तन करवाया, फिर उससे निकाह कर जबरन साथ रहने के लिए मजबूर किया.
विरोध करने पर आशा को धमकाया और पीटा गया. आशा ने खुद भाई को फोन करके अपनी हालत बताई थी, लेकिन जब उन्होंने सिविल लाइन थाने में शिकायत दर्ज कराई, तो उस समय कोई कार्रवाई नहीं हुई.
अब दोबारा खुला मामला
अब जब बदर अख्तर का नाम छांगुर बाबा गिरोह से जुड़ा सामने आया है, तो आशा नेगी का पुराना केस फिर से खुल गया है. आशा के बड़े भाई अनिल नेगी की नई शिकायत पर अब पुलिस ने बदर अख्तर और उसके पिता के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है.
पुलिस की तफ्तीश तेज
पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दो टीमें बनाई हैं. इन टीमों ने नोएडा में छानबीन की, जहां कभी आशा और बदर साथ रहते थे. जब पुलिस फ्लैट पर पहुंची तो वहां अब कोई और परिवार रह रहा था. सीसीटीवी फुटेज भी नहीं मिल पाई जिससे जांच में मुश्किल आ रही है. अब पुलिस मोबाइल कॉल रिकॉर्ड, मुखबिरों से मिली जानकारी और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ रही है. पुलिस को शक है कि आशा के गायब होने के बाद बदर फरार हो गया था.
लव जिहाद की भी आशंका
परिवार का दावा है कि आशा को जान-बूझकर प्रेम जाल में फंसाया गया, जिससे वह धर्म बदलकर बदर के साथ रहे. इस तरह का तरीका लव जिहाद और सुनियोजित धर्मांतरण का हिस्सा हो सकता है. अब मामला छांगुर बाबा गैंग से जुड़ने के बाद और संवेदनशील हो गया है.
थाने के पूर्व इंस्पेक्टर की भूमिका संदिग्ध
जब आशा की गुमशुदगी की रिपोर्ट 2019 में दी गई थी, तब सिविल लाइन थाने में इंस्पेक्टर अब्दुल रहमान सिद्दीकी तैनात थे. FIR दर्ज न करने और कार्रवाई न करने की वजहें अब जांच के घेरे में हैं. संभावना है कि अब उनसे पूछताछ होगी, और उनकी संपत्ति की जांच भी हो सकती है.
6 साल बाद पुलिस हरकत में
पुलिस के मुताबिक, अब तक न तो आशा का कोई सुराग मिला है और न ही बदर का. लेकिन इस बार पुलिस का रवैया पहले से ज्यादा सख्त और सक्रिय नजर आ रहा है. मेरठ से नोएडा तक सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है और बदर अख्तर का पासपोर्ट रद्द कराने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है.
यह मामला केवल एक महिला की गुमशुदगी का नहीं, बल्कि धर्मांतरण गैंग से जुड़ी एक बड़ी साजिश का हिस्सा भी हो सकता है. 6 साल की लंबी चुप्पी के बाद अब आशा नेगी को न्याय दिलाने की उम्मीद जागी है. पुलिस की जांच में कई और खुलासे सामने आ सकते हैं.