धर्मांतरण गिरोह के मास्टरमाइंड छांगुर बाबा के खास गुर्गे बदर अख्तर सिद्दीकी की करतूतें लगातार सामने आ रही हैं. मेरठ की प्रिया त्यागी से पहले उत्तराखंड की रहने वाली आशा नेगी भी बदर की शिकार बनी थीं. आशा पिछले 7 साल से लापता हैं और उनके परिवार को आज तक कोई जानकारी नहीं मिली है. उनकी तलाश में परिवार दर-दर भटक रहा है, लेकिन न तो मुकदमा दर्ज हुआ और न ही अब तक कोई कार्रवाई हो सकी है.
2018 में अचानक गायब हुई आशा
पांडवनगर में रहने वाले अनिल नेगी ने बताया कि उनकी बहन आशा नेगी एक एचआर प्रोफेशनल थीं और मेरठ में एक कंपनी में काम करती थीं. बाद में वह नोएडा के सेक्टर-62 में रहने लगीं. अनिल का आरोप है कि मेरठ में रहते हुए बदर ने आशा को अपने जाल में फंसा लिया.
बदर चला रहा था आशा का मोबाइल
अनिल ने बताया कि 2018 में बदर, आशा का मोबाइल खुद इस्तेमाल कर रहा था. वह आशा बनकर कभी-कभी व्हाट्सएप पर मैसेज भेजता था, लेकिन कॉल पर बात नहीं करता था. एक बार आशा ने मारपीट के बाद अपनी फोटो और बदर के खिलाफ सबूत अपने भाई को भेजे थे. उन्होंने बदर के पैन कार्ड, पासपोर्ट, वोटर आईडी और दूसरे दस्तावेज व्हाट्सएप पर शेयर किए थे. आशा ने साफ तौर पर अपनी जान को खतरा बताया था.
पुलिस ने दर्ज नहीं किया केस, परिवार परेशान
अनिल का आरोप है कि उन्होंने 2019 में सिविल लाइंस थाने में एफआईआर दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने केस नहीं लिखा. उन्हें सिर्फ मेरठ और नोएडा पुलिस के बीच दौड़ाया गया. उनका कहना है कि बदर का कोई रिश्तेदार ऊंचे पद पर है, जिससे दबाव में पुलिस ने कार्रवाई नहीं की.
7 साल बाद भी नहीं मिला इंसाफ
परिवार अब तक आशा के लौटने का इंतजार कर रहा है और उन्हें इंसाफ की उम्मीद है. अनिल ने बताया कि अगर उस समय पुलिस कार्रवाई करती तो शायद आशा को बचाया जा सकता था. बदर अख्तर सिद्दीकी पर अब कई गंभीर आरोप लग चुके हैं और ED की जांच में उसका नाम भी सामने आया है.
यह मामला एक बार फिर महिलाओं की सुरक्षा और पुलिस की लापरवाही पर सवाल खड़े करता है. आशा ने अपने भाई को सभी सबूत दे दिए थे, लेकिन फिर भी वह आज तक गुमशुदा है और बदर आज़ाद.