लखनऊ। शहर का अशफाक उल्ला खान चिड़ियाघर आजकल हर उस खूंखार जानवर का रेस्क्यू सेंटर बन गया है, जो लोगों पर जानलेवा हमला कर रहे हैं या फिर किसी बीमारी से जूझ रहे हैं। इसके अलावा यह लोगों के पर्यटन का भी बड़ा केंद्र बन चुका है। सिर्फ गोरखपुर ही नहीं इसके पड़ोस के जिलों से पर्यटक यहां आ रहे हैं। ठंड का मौसम शुरू होते ही यहां पर पर्यटकों की आमद काफी ज्यादा बढ़ी है। नवंबर- दिसंबर 2025 में यहां प्रतिमाह लाखों से अधिक की संख्या में पर्यटक भ्रमण करने के लिए आए।
1 जनवरी को 18 हजार 665 पर्यटक आए
एक जनवरी 2026 के पहले दिन ही 18 हजार 665 पर्यटकों ने चिड़ियाघर का भ्रमण किया और यहां के पशु-पक्षियों को देख कर आनंदित हुए। यह प्रदेश का पहला चिड़ियाघर है जहां पर हाथी बाड़ा भी बनाया गया है और गंगा हाथी को यहां सुरक्षित रखा गया है। दूसरा बाड़ा भी बनाया जा रहा है। जेब्रा का बाड़ा भी तैयार हो गया है उसे भी बहुत जल्द इस चिड़ियाघर में लाया जाएगा। इसके भीतर ढाई एकड़ में फैला बहुत शानदार वेटलैंड है जहां पर स्थानीय और विदेशी पक्षियों की चरहचाहट भी गूंजती है।
यूपी का दूसरा सबसे बड़ा चिड़ियाघर
मायावती सरकार में इस चिड़ियाघर की स्थापना तत्कालीन वन एवं जीव जंतु मंत्री फतेह बहादुर सिंह के हाथों हुआ था। उन्होंने मई 2011 में इसके निर्माण कार्य का लोकार्पण भी किया था। उनके पिता पूर्व मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह का सपना था कि गोरखपुर में चिड़ियाघर बने। इसलिए उन्होंने इसका प्रयास किया और धरातल पर उसे उताररा। लेकिन यह अपने असली स्वरूप और पर्यटकों के भ्रमण के लायक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में हुआ। जब उन्होंने इसका विधिवत 27 मार्च 2021 को उद्घाटन किया। यह 121 एकड़ क्षेत्रफल में फैला हुआ है। कानपुर चिड़ियाघर के बाद यह दूसरा सबसे बड़ा चिड़ियाघर है। सोमवार के दिन या बंद रहता है।
इस चिड़ियाघर की देखभाल के लिए राज्य सरकार ने यहां निदेशक के रूप में डॉ. बीसी ब्रह्मा की तैनाती कर रखा है. डिप्टी डायरेक्टर की भूमिका डॉ. योगेश सिंह निभा रहे हैं. दो रेंज अफसर और 10 अधीनस्थ स्टाफ यहां की व्यवस्था संभाल रहे हैं। 130 कर्मचारी आउटसोर्स पर रखे गए हैं जो जू कीपर से लेकर विभिन्न कार्यों में चिड़ियाघर में अपनी सेवा दे रहे हैं।
अब तक करीब 250 करोड़ रुपए खर्च
डिप्टी डायरेक्टर डॉ. योगेश सिंह ने बताया कि यहां ठंड के महीने में जानवरों की सुरक्षा और देखभाल का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। रात में गस्त करनी पड़ती है. उन्हें ठंड के लिए अलाव का भी व्यवस्था दिया जाता है। जू के निर्माण पर अब तक करीब ढाई सौ करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं. चिड़ियाघर सुबह 9:30 बजे से शाम 5:30 तक दर्शकों के लिए खुला रहता है और टिकट मूल्य मात्र 25 और 50 रुपये निर्धारित है। समय का कोई बंधन नहीं है। एक बार टिकट लिया तो आप 8 घंटे तक चिड़ियाघर का भ्रमण कर सकते हैं। इसके भीतर खान-पान, रेस्टोरेंट्स जैसी सुविधा पर्यटकों के लिए उपलब्ध है।
300 से अधिक वन्य जीव
उन्होंने बताया कि चिड़ियाघर में 40 से अधिक प्रजाति के करीब 300 से अधिक वन्य जीव रह रहे हैं। पूरे प्रदेश भर से इस समय रेस्क्यू जानवर यहां लाये जा रहे हैं। रही बात पर्यटकों के मुख्य आकर्षण के जानवरों की तो उनमें टाइगर, लायन, दरियाई घोड़ा, हाथी, गैंडा, भालू, बारासिंघा, भेड़िया, तरह-तरह के सांप और अद्भुत तितलियों का संग्रह तितली आडिटोरियम में देखने को मिलता है। परिसर में 7डी थिएटर बनाया गया है। जिसमें घूमने के लिए आने वाले पर्यटक हों या स्कूली बच्चे, उन्हें जीव- जंतुओं के जीवन चक्र से जुड़ी तमाम बेहतरीन घटनाओं, जीवन चक्र पर फिल्म देखने को मिलता है।
आसानी से पहुंचा जा सकता है
उन्होंने कहा कि यहां का वेट लैंड भी बेहद ही खूबसूरत है वह पूरी तरह से नेचुरल स्वरूप में ही बनाए रखें गया है। उसमें मछली पालन नहीं होता है न ही किसी प्रकार दवा आदि का उसमें छिड़काव होता है। यहां गोरखपुर रेलवे बस स्टेशन हो या हवाई अड्डा दोनों जगह से आसानी से पहुंचा जा सकता है। रेलवे और बस स्टेशन से इसकी दूरी करीब 8 किलोमीटर और हवाई अड्डे से लगभग 11 किलोमीटर है। यहां दुकाने, कैफेटेरिया, कियोस्क के साथ एटीम और क्लॉक रूम भी उपलब्ध है। महाराजगंज से राम प्रकाश और बलिया से आए योगेश वर्मा ने कहा कि वन्य जीवों को नजदीक से देखने, उनके बारे में पढ़ने की जिज्ञासा के साथ वह परिवार सहित यहां घूमने आए हैं उन्हें बहुत आनंद मिला है।
2 महीने तक बंद था चिड़ियाघर
मार्च 2021 में जनता के लिए खुल जाने के बाद चिड़ियाघर में कोई बड़ी समस्या में 2025 में देखने को मिली। जब यहां बर्ड फ्लू की चपेट में आने से पांच जानवरों की मौत हो गई। इसका असर लखनऊ और कानपुर के चिड़ियाघर में भी देखने को मिला। करीब 2 महीने तक चिड़ियाघर बंद था। पर्यटकों का आना बंद था। और हाई सेंसेटिव जोन बनाकर यहां जानवरों की निगरानी और देखभाल हो रही थी। मरने वाले जानवरों में बाघ केसरी, बघिन शक्ति, भेड़िया भैरवी, तेंदुआ मोना, शेर पटौदी शामिल हैं। शुरुआती जांच में इनकी मौत को अलग-अलग बीमारियों से माना जा रहा था, लेकिन, बाद में जब इनके नमूनों की जांच हुई तो सभी में एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस यानी कि बर्ड फ्लू की मौजूदगी में पाई गई थी।
बैटरी चालित गाड़ी की भी सुविधा
गोरखपुर चिड़ियाघर में जिन जानवरों को रेस्क्यू कर लाया गया है उसमें तेंदुआ, बाघ, भालू, भेड़िया, गिद्ध और हिरण शामिल हैं। यहां तक की तेंदुओं के शावकों को भी यहां रेस्क्यू कर यहां लाया गया है। बाघिन मैलानी को वर्ष 2021 में लखनऊ जू से बीमारी से पीड़ित होने के बाद यहां लाया गया था जो नवम्बर 2025 में दम तोड़ दी। अभी यहां पर जेब्रा,चिंपांजी, मकाऊ, हुक्कू बंदर, टेल्ड मकाक, फ्लेमिंगो जैसे पक्षी और जानवर को लाया जाना है। यहां आने वाले पर्यटकों के लिए बैटरी चालित गाड़ी की भी सुविधा है। जंगल से सटी 150 एकड़ भूमि पर जंगल सफारी बनाने की भी योजना पर काम चल रहा है। टॉय ट्रेन भी इसमें शुरू की जाएगी इसकी भी तैयारी है।