ASIAN GAMES SHOOTING: भोपाल की निशानेबाज आशी चौकसे ने एशियन गेम्स में एक बार फिर भारत का नाम रोशन किया। जापान के आइची में 50 मीटर राइफल थ्री पोजिशन टीम स्पर्धा में आशी, तिलोत्तमा सेन और विदर्सा विनोद की भारतीय तिकड़ी ने 1763 अंकों के साथ रजत पदक जीता। चीन ने 1773 अंकों के साथ स्वर्ण और कजाकिस्तान ने कांस्य पदक हासिल किया। आशी ने टीम के स्कोर में 585 अंकों का योगदान दिया।
गोल्ड की उम्मीद थी, हवा ने बिगाड़ा समीकरण
आशी ने बताया कि मुकाबले के दौरान तेज हवाओं का काफी असर पड़ा। खासतौर पर स्टैंडिंग पोजिशन में हवा के कारण निशाने पर नियंत्रण और स्कोरिंग प्रभावित हुई। आशी के मुताबिक, अगर हवा इतनी तेज नहीं होती तो टीम के पास गोल्ड जीतने का बेहतर मौका था। वह अपने व्यक्तिगत प्रदर्शन को लेकर भी पूरी तरह संतुष्ट नहीं दिखीं।
टीम के लिए 585 अंकों का योगदान
आशी ने कुल 585 अंक हासिल किए, जिसमें स्टैंडिंग पोजिशन में 190 अंक शामिल रहे। हालांकि वह व्यक्तिगत फाइनल में जगह नहीं बना सकीं, लेकिन टीम के कुल स्कोर में उनका योगदान महत्वपूर्ण रहा। भारतीय तिकड़ी ने 1763 अंक जुटाकर दूसरा स्थान हासिल किया और रजत पदक अपने नाम किया।
एशियन गेम्स में दूसरा सिल्वर
50 मीटर राइफल थ्री पोजिशन की टीम स्पर्धा में आशी का यह एशियन गेम्स का दूसरा रजत पदक है। इससे पहले हांगझोऊ एशियन गेम्स में भी उन्होंने इसी टीम इवेंट में सिल्वर जीता था। इसके अलावा उन्होंने व्यक्तिगत स्पर्धा में कांस्य पदक भी हासिल किया था।
NCC से शुरू हुआ शूटिंग का सफर
भोपाल में जन्मीं आशी ने कक्षा 9 में एनसीसी के जरिए शूटिंग शुरू की थी। इसके बाद उन्होंने मध्यप्रदेश राज्य शूटिंग अकादमी में प्रशिक्षण लिया। कोच सुमा शिरूर और वैभव शर्मा के मार्गदर्शन में उन्होंने अपनी पहचान बनाई। उनकी स्कूली शिक्षा कार्मेल कॉन्वेंट, बीएचईएल, भोपाल से हुई है।
अब वर्ल्ड चैंपियनशिप अगला लक्ष्य
आशी पिछले करीब एक साल से एशियन गेम्स की तैयारी कर रही थीं और उनकी नजर गोल्ड पर थी। रजत पदक के बाद अब उनका अगला लक्ष्य ISSF वर्ल्ड चैंपियनशिप है, जो नवंबर में दोहा में प्रस्तावित है। आशी का कहना है कि वह दूसरे खिलाड़ियों से तुलना करने के बजाय अपने प्रदर्शन को लगातार बेहतर करने पर ध्यान देती हैं।