पंजाब के अमृतसर से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरे पुलिस महकमे को झकझोर दिया है। देर रात गश्त पर तैनात ASI हरजीत सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई। घटना थाना गेट हकीमां इलाके के तहत हुई, जहां ड्यूटी के दौरान अज्ञात हमलावरों ने उन्हें निशाना बनाया। वारदात के बाद इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई और पुलिस ने जांच शुरू कर दी।
जिम्मेदारी के दावे से बढ़ी चर्चा
घटना के बाद एक आतंकी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया। हालांकि पंजाब पुलिस ने फिलहाल आतंकी एंगल को खारिज किया है। पुलिस का कहना है कि जांच के सभी पहलुओं पर काम किया जा रहा है और किसी निष्कर्ष पर पहुंचना अभी जल्दबाजी होगी। इसी वजह से यह मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया है।
सरकार ने किया मुआवजे का ऐलान
मुख्यमंत्री ने ASI हरजीत सिंह के परिवार के लिए 1 करोड़ रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है। इसके अलावा HDFC बैंक की ओर से 1 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बीमा भुगतान भी परिवार को दिया जाएगा। पंजाब पुलिस ने कहा है कि शहीद अधिकारी को पूरे राजकीय और पुलिस सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाएगी।
विपक्ष ने कानून व्यवस्था पर उठाए सवाल
इस घटना के बाद पंजाब की राजनीति भी गरमा गई है। भाजपा और अकाली दल ने राज्य की कानून व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं। भाजपा नेता तरुण चुघ ने कहा कि पिछले कुछ समय में पुलिस ठिकानों और पुलिसकर्मियों पर कई हमले हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि ऐसी घटनाओं से लोगों में डर का माहौल बन रहा है और सरकार को सख्त कदम उठाने चाहिए।
हाल के हमलों ने बढ़ाई चिंता
अमृतसर में हाल के दिनों में पुलिसकर्मियों पर हमलों की कई घटनाएं सामने आई हैं। 30 अगस्त को ASI पवन कुमार शर्मा ड्यूटी के दौरान हादसे में घायल हुए थे और बाद में उनकी मौत हो गई। 11 सितंबर को ASI जसवंत सिंह पर हमला हुआ था, जिसमें वह बाल-बाल बचे। अब ASI हरजीत सिंह की हत्या ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई चिंता खड़ी कर दी है।
जांच पर टिकी सबकी नजर
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि ASI हरजीत सिंह की हत्या किसने और क्यों की। पुलिस हर एंगल से जांच कर रही है और हमलावरों की तलाश जारी है। शुरुआती दावों और राजनीतिक आरोपों के बीच अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर है, जो इस पूरे मामले की असली तस्वीर सामने ला सकती है।
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