सप्ताह के पहले ही दिन भारतीय शेयर बाजार ने निवेशकों को चौंका दिया। जैसे ही कारोबार शुरू हुआ, सेंसेक्स और निफ्टी दोनों बुरी तरह टूटते नजर आए। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स खुलते ही कुछ ही मिनटों में 525 अंक से ज्यादा फिसल गया। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 150 अंक तक टूट गया। यह गिरावट ऐसे समय आई जब एशिया के लगभग सभी बड़े बाजार मजबूती के साथ कारोबार कर रहे थे।
ओपनिंग के साथ ही सेंसेक्स निफ्टी धड़ाम
सेंसेक्स अपने पिछले बंद 83,576.24 के मुकाबले गिरकर 83,435.31 पर खुला। इसके बाद गिरावट तेज होती चली गई और यह 83,043 के स्तर तक आ गया। इसी तरह निफ्टी भी अपने पिछले बंद 25,683.30 से नीचे 25,669.05 पर खुला और कुछ ही देर में 150 अंक से ज्यादा टूटकर 25,529 के स्तर तक पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में ही बाजार की यह हालत देखकर निवेशकों की चिंता बढ़ गई।
दिग्गज और मिडकैप शेयरों में बिकवाली
बाजार की गिरावट का असर बड़े शेयरों पर भी साफ दिखा। बीएसई लार्जकैप में BEL, Adani Ports और PowerGrid जैसे शेयर गिरावट में रहे। मिडकैप शेयरों में BHEL, IPCALAB, Ola Electric, PowerIndia और UBL में तेज बिकवाली देखने को मिली। स्मॉलकैप शेयरों में तो हालात और खराब रहे, जहां कुछ शेयर 8% से 12% तक टूट गए। इससे साफ हो गया कि दबाव सिर्फ चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं था।
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पिछले हफ्ते की कमजोरी का असर जारी
भारतीय बाजार में यह गिरावट अचानक नहीं आई है। पिछले हफ्ते भी बाजार दबाव में रहा था। पांच कारोबारी दिनों में सेंसेक्स 2,185.77 अंक या 2.54% टूट चुका था। इस दौरान देश की 10 सबसे बड़ी कंपनियों में से 7 की बाजार कीमत में करीब 3.63 लाख करोड़ रुपये की गिरावट आई थी। Reliance और HDFC Bank जैसी दिग्गज कंपनियों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ था।
एशिया में तेजी फिर भारत क्यों पिछड़ा
एक तरफ जापान का Nikkei 1.61% की तेजी के साथ 51,939 पर कारोबार कर रहा था। हांगकांग का Hang Seng भी 26,456 के स्तर पर मजबूती दिखा रहा था। साउथ कोरिया का Kospi भी तेज उछाल के साथ आगे बढ़ रहा था। इसके बावजूद भारतीय बाजार दबाव में रहा। Gift Nifty में 180 अंक से ज्यादा की गिरावट ने भी घरेलू बाजार के लिए नकारात्मक संकेत दिए।
गिरावट के पीछे ये बड़े कारण
बाजार में गिरावट के पीछे कई वजहें मानी जा रही हैं। रूसी तेल की खरीद को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से 500% टैरिफ की धमकी ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली से भी बाजार पर दबाव बना हुआ है। इसके अलावा ईरान संकट के चलते तेल की कीमतों में उछाल से बाजार का माहौल और कमजोर हुआ है। इन सभी कारणों ने मिलकर भारतीय शेयर बाजार को लाल निशान में धकेल दिया।