असम चुनाव में ‘परिवार वार’: गोगोई बनाम हिमंता की जंग अब पत्नियों के आरोप-प्रत्यारोप तक
असम विधानसभा चुनाव के आखिरी चरण से पहले सियासी माहौल बेहद गर्म हो गया है। मुद्दों और विकास की बहस से आगे बढ़कर अब चुनावी लड़ाई व्यक्तिगत आरोपों तक पहुंच गई है। मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma और कांग्रेस नेता Gaurav Gogoi के बीच चल रही टकराहट अब उनकी पत्नियों को लेकर लगाए जा रहे आरोपों में बदल गई है, जिससे राजनीति में नया मोड़ आ गया है।
चुनाव से पहले तेज हुई जुबानी जंग
असम में मतदान से ठीक पहले राजनीतिक बयानबाजी अपने चरम पर पहुंच गई है। बीजेपी जहां हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में लगातार तीसरी बार सत्ता हासिल करने की कोशिश में है, वहीं कांग्रेस गौरव गोगोई के चेहरे पर वापसी की उम्मीद लगाए बैठी है। इस बीच दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप ने चुनावी माहौल को और ज्यादा गर्म कर दिया है।
गोगोई की पत्नी पर पहले उठे सवाल
चुनाव अभियान की शुरुआत से ही हिमंता बिस्वा सरमा, गौरव गोगोई की पत्नी एलिजाबेथ कोलबोर्न को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। उन्होंने पाकिस्तान से कथित संबंधों और संवेदनशील जानकारी साझा करने जैसे गंभीर आरोप लगाए। इस मामले को गंभीर बताते हुए राज्य स्तर पर जांच की बात भी सामने आई, जिससे यह मुद्दा लंबे समय तक सुर्खियों में बना रहा।
सरमा की पत्नी पर कांग्रेस का पलटवार
अब कांग्रेस ने पलटवार करते हुए सरमा की पत्नी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी प्रवक्ता Pawan Khera ने दावा किया कि उनकी पत्नी के पास कई देशों के पासपोर्ट और विदेशों में संपत्तियां हैं, जिनका खुलासा नहीं किया गया। इस आरोप के बाद सियासी बहस और तेज हो गई है, और चुनावी फोकस मुद्दों से हटकर व्यक्तिगत जीवन पर आ गया है।
बीजेपी का जवाब: आरोपों को बताया मनगढ़ंत
बीजेपी की ओर से इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया गया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि पेश किए गए दस्तावेजों में कई तकनीकी खामियां हैं और यह सब चुनाव से पहले भ्रम फैलाने की कोशिश है। खुद हिमंता बिस्वा सरमा ने इन आरोपों को दुर्भावनापूर्ण बताते हुए कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
राजनीति में निजी हमलों का बढ़ता दायरा
असम चुनाव में जिस तरह से निजी रिश्तों को लेकर आरोप लगाए जा रहे हैं, उसने राजनीतिक विमर्श के स्तर पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विकास, रोजगार और जनहित के मुद्दों की जगह अब व्यक्तिगत आरोपों ने ले ली है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि मतदाता इस सियासी जंग को किस नजर से देखते हैं और चुनावी नतीजों पर इसका कितना असर पड़ता है।