असम की राजनीति में एक नया अध्याय जुड़ गया है। Himanta Biswa Sarma ने लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर राज्य में अपनी मजबूत पकड़ साबित कर दी। गुवाहाटी के खानापारा में आयोजित भव्य समारोह में प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री और कई राज्यों के मुख्यमंत्री मौजूद रहे। विधानसभा चुनाव में NDA की बड़ी जीत के बाद यह शपथ ग्रहण समारोह राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के रूप में भी देखा जा रहा है।
लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बने हिमंता
गुवाहाटी के खानापारा मैदान में आयोजित समारोह में राज्यपाल ने हिमंता बिस्वा सरमा को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इसके साथ ही वे असम के पहले गैर-कांग्रेसी नेता बन गए हैं जिन्होंने लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद संभाला है। समारोह में बड़ी संख्या में समर्थकों की मौजूदगी ने राजनीतिक माहौल को और उत्साहित कर दिया।
NDA की प्रचंड जीत ने बदली तस्वीर
2026 विधानसभा चुनाव में NDA ने राज्य में शानदार प्रदर्शन करते हुए 102 सीटों पर कब्जा जमाया। बीजेपी ने अकेले 82 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया, जबकि सहयोगी दलों ने भी मजबूत प्रदर्शन किया। इस जीत को राज्य में विकास और संगठनात्मक मजबूती पर जनता की मुहर माना जा रहा है।
कैबिनेट में अनुभवी नेताओं की वापसी
नई सरकार के साथ कई अनुभवी चेहरों को फिर से जिम्मेदारी मिली है। अजंता नियोग, अतुल बोरा और चरण बोरो जैसे नेता पहले भी सरकार का हिस्सा रह चुके हैं। वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री रामेश्वर तेली की राज्य की राजनीति में वापसी चर्चा का केंद्र बनी हुई है। माना जा रहा है कि नए मंत्रिमंडल में कई नए और पुराने चेहरों का संतुलन देखने को मिलेगा।
खानापारा बना राजनीतिक शक्ति का केंद्र
शपथ ग्रहण समारोह के लिए खानापारा में भव्य तैयारियां की गई थीं। राज्यभर से आए हजारों कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने समारोह को ऐतिहासिक बना दिया। आयोजन स्थल पर सुरक्षा और व्यवस्थाओं के विशेष इंतजाम किए गए थे। यह कार्यक्रम केवल शपथ ग्रहण तक सीमित नहीं रहा बल्कि NDA की राजनीतिक ताकत का बड़ा प्रदर्शन भी बन गया।
विकास और नेतृत्व पर जनता की मुहर
हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में राज्य सरकार की कई योजनाओं और फैसलों को जनता का समर्थन मिला है। लगातार दूसरी बार सत्ता में वापसी ने यह संकेत दिया है कि राज्य की जनता विकास और स्थिर नेतृत्व को प्राथमिकता दे रही है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह जीत आने वाले समय में पूर्वोत्तर की राजनीति पर भी असर डाल सकती है।