Assam passes stringent law: असम विधानसभा ने बहुविवाह पर रोक लगाने के लिए गुरुवार को महत्वपूर्ण विधेयक पास किया, जिसके साथ राज्य में विवाह संबंधी कानूनों को और सख्त कर दिया गया है। नए कानून के तहत यदि कोई व्यक्ति अपनी पहली शादी का विवरण छिपाकर दूसरी शादी करता है, तो उसे अधिकतम 10 साल की कैद और जुर्माने की सजा दी जाएगी। इसके अलावा पीड़ित महिला को 1.40 लाख रुपये मुआवजा देने का भी प्रावधान रखा गया है। विधेयक में एसटी समुदाय और छठी अनुसूची वाले क्षेत्रों को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने साफ कहा कि यह कानून किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं है और महिलाओं को कानूनी सुरक्षा देने के लिए बनाया गया है।
सीएम बोले– कानून सबके लिए समान
विधानसभा में चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि बहुविवाह केवल मुस्लिम समाज का मुद्दा नहीं, बल्कि हिंदू, ईसाई और अन्य समुदायों में भी ऐसे मामले सामने आते हैं। इसलिए यह कानून सभी पर समान रूप से लागू होगा। उन्होंने कहा कि कुछ लोग इसे धार्मिक कोण से जोड़ रहे हैं, जो पूरी तरह गलत है। सरमा ने विपक्ष से अपील की कि वे अपने संशोधन वापस लें ताकि यह संदेश जाए कि महिला अधिकारों को मजबूत करने के लिए पूरा सदन एकजुट है। हालांकि एआईयूडीएफ और माकपा ने अपने संशोधन प्रस्तुत किए, जिन्हें ध्वनि मत से खारिज कर दिया गया।
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UCC लागू करने का संकेत
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि यह कानून समान नागरिक संहिता (UCC) की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने घोषणा की कि यदि वह अगले विधानसभा चुनाव के बाद फिर से मुख्यमंत्री बनते हैं, तो नई सरकार के पहले ही सत्र में UCC विधेयक पेश किया जाएगा। साथ ही सरमा ने यह भी बताया कि धोखाधड़ी से होने वाले विवाहों—जिन्हें अक्सर लव-जिहाद बताया जाता है—के खिलाफ फरवरी के अंत तक एक अलग कानून लाया जाएगा। सरकार का दावा है कि इन कानूनी सुधारों का उद्देश्य महिलाओं की सुरक्षा, पारिवारिक स्थिरता और विवाह व्यवस्था में पारदर्शिता को मजबूत करना है।