जहां एक ओर पाकिस्तान चीन के बनाए जेएफ-17 फाइटर जेट को अपना बताकर अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचने की कोशिश कर रहा है, वहीं भारत अपने स्वदेशी हथियारों के दम पर वैश्विक रक्षा बाजार में मजबूती से पैर जमा चुका है। ब्रह्मोस, आकाश मिसाइल और खासतौर पर ATAGS जैसी प्रणालियां आज भारत को सिर्फ खरीदार नहीं, बल्कि भरोसेमंद हथियार निर्यातक बना रही हैं।
JF-17 बनाम भारतीय हथियारों की साख
पाकिस्तान इन दिनों जेएफ-17 फाइटर जेट को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सक्रिय है। यह विमान चीन की तकनीक पर आधारित है, जिसे पाकिस्तान अपने यहां असेंबल करता है। हालांकि, इसके संभावित खरीदार सीमित हैं और किसी बड़े सौदे पर अब तक ठोस मुहर नहीं लग पाई है। इसके उलट भारत के हथियारों की मांग उनकी क्षमता और युद्धक्षेत्र में साबित प्रदर्शन के कारण तेजी से बढ़ी है।
डिफेंस एक्सपोर्ट में भारत की ऐतिहासिक छलांग
पिछले एक दशक में भारत के रक्षा निर्यात में करीब 34 गुना की बढ़ोतरी हुई है। वित्त वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा 23,622 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। आज भारत लगभग 100 देशों को हथियार और सैन्य उपकरण निर्यात कर रहा है। इस बढ़त में निजी क्षेत्र और स्वदेशी तकनीक की बड़ी भूमिका रही है, जिसने भारत को आत्मनिर्भर रक्षा शक्ति के रूप में स्थापित किया है।
ब्रह्मोस और आकाश के बाद ATAGS बना गेमचेंजर
भारतीय हथियारों में सबसे ज्यादा चर्चा ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम की होती है, जिसने अपनी गति और मारक क्षमता से वैश्विक पहचान बनाई। इसके बाद आकाश एयर डिफेंस सिस्टम आता है। लेकिन इन दिनों सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोर रहा है एडवांस्ड टोइड आर्टिलरी गन सिस्टम यानी ATAGS, जिसे भारतीय सेना ने ‘अमोघ’ नाम दिया है।
ATAGS: ताकत, रेंज और रफ्तार का मेल
ATAGS एक 155 मिमी/52 कैलिबर की स्वदेशी तोप है, जिसे पुराने आर्टिलरी सिस्टम की जगह विकसित किया गया है। यह 48 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम है और प्रति मिनट 5 से 6 गोले दाग सकती है। खास बात यह है कि यह लगातार 60 मिनट में 60 गोले दागने की क्षमता रखती है और महज 90 सेकेंड में अपनी जगह बदल सकती है, जो युद्ध के मैदान में इसे बेहद घातक बनाती है।
दुनिया क्यों हो रही है ATAGS की दीवानी
ATAGS की सफलता अब भारत की सीमाओं से बाहर भी दिख रही है। अर्मेनिया पहले ही इस तोप का बड़ा ऑर्डर दे चुका है। इसके प्रदर्शन से प्रभावित होकर पश्चिम एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देश इसे खरीदने की प्रक्रिया में हैं। सऊदी अरब में इसके ट्रायल चल रहे हैं, जबकि यूएई और इंडोनेशिया के साथ बातचीत निर्णायक दौर में पहुंच चुकी है। यह साफ संकेत है कि भारतीय हथियार अब गुणवत्ता और भरोसे का प्रतीक बन चुके हैं।