
हिंदू पंचांग के अनुसार अगस्त क महीना धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बेहद खास माना जाता है. इस दौरान कई बड़े पर्व, व्रत और पूजन उत्सव आते हैं जो न केवल आस्था से जुड़े होते हैं, बल्कि सामाजिक संबंधों को भी मजबूत करते हैं. इस साल अगस्त में रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी जैसे प्रमुख पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाए जाएंगे.
शुरुआत पुत्रदा एकादशी से
5 अगस्त को पुत्रदा एकादशी का व्रत होगा, जो संतान सुख और समृद्धि के लिए किया जाता है. पूजा का शुभ समय सुबह 6:10 से 8:20 बजे तक रहेगा. इसके अगले दिन 6 अगस्त को शुक्ल पक्ष का प्रदोष व्रत संध्या 6:45 से 8:15 बजे के बीच भगवान शिव को समर्पित किया जाएगा.
वरलक्ष्मी व्रत और रक्षाबंधन
8 अगस्त को दक्षिण भारत में विशेष महत्व रखने वाला वरलक्ष्मी व्रत मनाया जाएगा, जिसका शुभ समय प्रातः 7:05 से 9:00 बजे तक है. 9 अगस्त को भाई-बहन के स्नेह का पर्व रक्षाबंधन मनाया जाएगा, राखी बांधने का शुभ मुहूर्त सुबह 10:15 से दोपहर 1:45 बजे तक है.
कजरी तीज और जन्माष्टमी का उल्लास
12 अगस्त को कजरी तीज और संकष्टी चतुर्थी का पर्व आएगा. कजरी तीज का पूजन सुबह 6:00 से 8:00 बजे और संकष्टी चतुर्थी चंद्रोदय पूजन रात 8:45 से 9:30 बजे होगा. 16 अगस्त को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी निशीथ काल में 12:04 AM से 12:47 AM तक मनाई जाएगी.
मासिक व्रत और अमावस्या का महत्व
19 अगस्त को अजा एकादशी, 20 अगस्त को कृष्ण पक्ष प्रदोष व्रत और 21 अगस्त को मासिक शिवरात्रि का पर्व होगा. 22 अगस्त को कुशग्रहणी अमावस्या मनाई जाएगी, जिसका शुभ समय सुबह 6:00 से 8:30 बजे तक रहेगा.
तेज, गणपति और राधा अष्टमी का समापन
26 अगस्त को हरतालिका तीज का निर्जला व्रत मनाया जाएगा, पूजन का शुभ समय सुबह 5:55 से 8:15 बजे तक रहेगा. 27 अगस्त को गणेश चतुर्थी का पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा, मूर्ति स्थापना का समय 11:05 से 1:40 बजे तक है. माह का समापन 31 अगस्त को राधा अष्टमी के साथ होगा, जिसका पूजन सुबह 9:00 से 11:00 बजे तक किया जाएगा.