यूरोप के कई देशों ने अमेरिका के सैन्य अभियानों से दूरी बनानी शुरू कर दी है। इसमें सबसे नया नाम ऑस्ट्रिया का जुड़ गया है। जिसने ईरान से जुड़े सैन्य ऑपरेशनों के लिए अपने एयरस्पेस के इस्तेमाल की अमेरिकी मांग ठुकरा दी है।
अलग-अलग आधार पर परखा जाएगा
ऑस्ट्रिया के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह फैसला देश के सख्त तटस्थता कानून के तहत लिया गया है। मंत्रालय के प्रवक्ता के हवाले से ब्रॉडकास्टर ओआरएफ ने पुष्टि की कि वाशिंगटन की ओर से कई अनुरोध आए थे, लेकिन हर मामले को विदेश मंत्रालय के साथ मिलकर अलग-अलग आधार पर परखा जाएगा। हालांकि, ऑस्ट्रिया ने पूरी तरह से अमेरिकी उड़ानों पर प्रतिबंध नहीं लगाया है, बल्कि हर अनुरोध की समीक्षा तथ्यों के आधार पर की जा रही है।
बमवर्षक विमानों को देने से इनकार
यूरोप में यह रुख अकेला नहीं है। स्पेन, जो इस युद्ध का खुलकर विरोध कर रहा है, पहले ही अपने एयरस्पेस को संघर्ष में शामिल अमेरिकी सैन्य विमानों के लिए बंद कर चुका है।
वहीं इटली ने भी पिछले हफ्ते सिसिली स्थित अपने सैन्य अड्डे के इस्तेमाल की अनुमति अमेरिकी बमवर्षक विमानों को देने से इनकार कर दिया था।
प्लेटफॉर्म्स पर खुलकर विरोध जता चुके हैं
यूरोपीय देशों के इनकार से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी काफी खफा हैं। वो ट्रुथ के अलावा विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर खुलकर विरोध जता चुके हैं। कई मीडिया साक्षात्कार में खुले तौर पर नाटो और यूरोपीय देशों के खिलाफ राय जाहिर कर चुके हैं। लगभग हर दूसरे दिन वो ट्रुथ पर मदद न करने का तंज कसते हुए कह देते हैं कि अमेरिका याद रखेगा। जिस होर्मुज स्ट्रेट पर कब्जे का वो दावा करते थे अब उसे लेकर भी उन्होंने रुचि नहीं दिखाई है। राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा कि अब उसकी जिम्मेदारी वो उठाएं, जिन्हें वहां से अपना सामान ले जाना है।
सैन्य मदद न देने पर नाराजगी
हाल ही में डेली टेलीग्राफ को दिए एक साक्षात्कार में ट्रंप ने ईरान-इजरायल संघर्ष के दौरान नाटो सहयोगियों, खासकर ब्रिटेन और फ्रांस की ओर से सैन्य मदद न देने पर नाराजगी जताई। ट्रंप ने नाटो को कागजी शेर (पेपर टाइगर) करार दिया और अमेरिका के गठबंधन से बाहर निकलने की धमकी दी।