प्रयागराज में माघ मेले को लेकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन के बीच टकराव और गहरा गया है। प्रशासन ने उन्हें एक और नोटिस जारी कर भविष्य में मेला क्षेत्र में स्थायी प्रतिबंध की चेतावनी दी है। नोटिस में मौनी अमावस्या के दिन सुरक्षा व्यवस्था भंग करने का आरोप लगाया गया है, वहीं शंकराचार्य पक्ष ने भी कानूनी जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है।प्रशासन का दूसरा
नोटिस और चेतावनी
मेला प्राधिकरण की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के अवसर पर आपात परिस्थितियों के लिए आरक्षित पांटून पुल के बैरियर तोड़कर बिना अनुमति संगम क्षेत्र की ओर बढ़ने का प्रयास किया गया। उस समय लाखों श्रद्धालु स्नान कर रहे थे और केवल पैदल आवागमन की अनुमति थी। प्रशासन का दावा है कि इस कदम से भीड़ प्रबंधन में भारी कठिनाई आई और भगदड़ की आशंका पैदा हुई।
नोटिस में लगाए गए गंभीर आरोप
नोटिस के अनुसार, प्रतिबंधित क्षेत्र में वाहन ले जाने और रोकने पर विवाद की स्थिति उत्पन्न करने से श्रद्धालुओं की सुरक्षा को खतरा पैदा हुआ। इसके साथ ही यह भी कहा गया कि शिविर में लगाए गए बोर्डों पर स्वयं को शंकराचार्य बताना सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के खिलाफ बताया गया है। प्रशासन ने 24 घंटे में जवाब न मिलने पर भूमि आवंटन और सुविधाएं निरस्त करने के साथ स्थायी प्रतिबंध लगाने की बात कही है।
शंकराचार्य पक्ष की कानूनी प्रतिक्रिया
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष को कानूनी नोटिस भेजा गया है, जिसमें प्रशासनिक नोटिस को वापस लेने की मांग की गई है। इसमें कहा गया है कि शंकराचार्य पद को लेकर मामला शीर्ष अदालत में विचाराधीन है, ऐसे में स्थानीय स्तर पर कार्रवाई करना अनुचित है। चेतावनी दी गई है कि तय समय में नोटिस वापस नहीं हुआ तो मानहानि और अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाएगी।
पोस्टर जारी कर अधिकारियों पर आरोप
शंकराचार्य ने पोस्टर जारी कर गृह सचिव, मंडलायुक्त, पुलिस आयुक्त और जिलाधिकारी पर संगम स्नान से रोकने और अनुचित व्यवहार का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि उनके साथ मौजूद बटुकों के साथ मारपीट हुई और अपमानजनक टिप्पणियां की गईं। इसके अलावा उन्होंने खुद को कुछ समय तक अगवा किए जाने और जान को खतरा होने जैसी गंभीर आशंकाएं भी जाहिर की हैं।
माघ मेले की व्यवस्था और आगे की राह
इस विवाद ने माघ मेले की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक निर्णयों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। दोनों पक्षों की ओर से नोटिस और जवाबी कार्रवाई के बाद मामला और जटिल होता नजर आ रहा है। आने वाले दिनों में प्रशासनिक स्तर पर निर्णय और कानूनी प्रक्रिया यह तय करेगी कि शंकराचार्य के शिविर और मेला क्षेत्र में उनकी मौजूदगी को लेकर आगे क्या रुख अपनाया जाता है।