Avimukteshwaranand: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, बिना स्नान के दुखी मन से लौट रहा हूं। इसकी कल्पना नहीं की थी।ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बुधवार को प्रयागराज माघ मेला बीच में ही छोड़ने का ऐलान कर दिया है।
हम बिना स्नान किए ही विदा ले रहे हैं
उन्होंने कहा कि बहुत दुखी मन से अपने 39 साल के आध्यात्मिक सफर में पहली बार माघ मेला बीच में ही छोड़कर जा रहा हूं। मन बहुत दुखी है। हम बिना स्नान किए ही विदा ले रहे हैं। प्रयागराज हमेशा से धर्म अध्यात्म और शांति की भूमि रही है। यहां बहुत ही श्रद्धा के साथ पिछले 39 सालों से आता रहा हूं, लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ कि स्नान करने से रोक दिया जाए। मेरे साथ और मेरे अनुयायियों के साथ जो घटना हुई वह आत्मा को झकझोर देने वाली थी। इससे न्याय और मानवता के प्रति मेरा विश्वास कमजोर हुआ है। मुझे जो कहना था, कह चुका हूं, लेकिन एक बात और बता दूं कि कल मुझे मेला प्रशासन की ओर से एक पत्र और भेजा गया। इसमें कहा गया है कि मुझे ससम्मान के साथ पालकी से संगम ले जाकर स्नान कराया जाएगा। मुझ पर फूल बरसाए जाएंगे, लेकिन मैने प्रस्ताव को ठुकरा दिया। जब दिल दुखी हो और मन में गुस्सा हो तो पवित्र पानी भी शांति नहीं दे पता है।
8 दिन पहले ही माघ मेला छोड़ दिया
बता दें कि माघ मेला 3 जनवरी से शुरू हुआ था। ये मेला 15 फरवरी तक चलेगा। 15 फरवरी को महाशिवरात्रि का स्नान है। अभी मगही पूर्णिमा, जोकि एक फरवरी को है और महाशिवरात्रि का स्नान पर बाकी है। इस बीच विवाद के कारण शंकराचार्यस्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने 18 दिन पहले ही माघ मेला छोड़ दिया है।
स्नान करने से रोका गया
गौर करें तो मौनी अमावस्या के स्नान पर्व यानी 18 जनवरी को पालकी से स्नान करने जाने के दौरान पुलिस प्रशासन ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को रोक दिया था। आरोप है कि उनके अनुयायियों और उनके बटुकों के साथ मारपीट की गई। उनकी शिखा पकड़ कर पुलिस ने उनके साथ बर्बर व्यवहार किया। अभद्रता की। उन्हें स्नान करने से रोका गया। इसके बाद 23 जनवरी को बसंत पंचमी का स्नान पड़ा था, लेकिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उस दिन भी स्नान नहीं किया। वह अपनी इस बात पर अड़े थे कि जब तक मेला के प्रशासनिक अफसर उनसे माफी नहीं मांग लेते और ससम्मान स्नान के लिए नहीं कहते, तब तक वह स्नान नहीं करेंगे। मौनी अमावस्या के दिन से ही वह लगातार अपने शिविर के बाहर, जहां पुलिस ने पालकी सहित छोड़ा था। वहीं धरने पर थे। इस बीच उन्हें मेला विकास प्राधिकरण ने दो नोटिस भी भेजा था। पहले नोटिस में उनके शंकराचार्य पद को लेकर के सुप्रीम कोर्ट का हवाला देकर के सवाल खड़े किए गए थे।
दोनों नोटिस का जवाब दिया गया
दूसरी नोटिस में उनसे पूछा गया था कि उन्होंने माघ मेला में अव्यवस्था फैलाई, बिना अनुमति के संगम स्नान पालकी से करना चाह रहे थे, इससे भगदड़ मच सकती थी। क्यों ना उन्हें जो मेला में भूमि आवंटित की गई है उसे रद्द कर दिया जाए और हमेशा के लिए उन्हें माघ मेला में आने से बैन कर दिया जाए?
शंकराचार्य की तरफ से इन दोनों नोटिस का जवाब दिया गया था। इस जवाब के बाद अब तीसरा पत्र मेला विकास प्राधिकरण का मिला है, जिसमें उन्हें ससम्मान स्नान करने के बाद कही गई। हालांकि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इस प्रस्ताव के काफी विलंब से आने और अन्य कारणों से ठुकरा दिया है। इस साथ ही शंकराचार्य ने स्नान न करने और माघ मेला को बीच में ही छोड़ने का निर्णय लिया है।