मौनी अमावस्या स्नान पर्व के दौरान संगम क्षेत्र में पुलिस से हुई धक्कामुक्की और हंगामे में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के 12 समर्थक घायल हो गए हैं। सभी घायलों को स्वरूप रानी नेहरू (एसआरएन) अस्पताल भेजा गया, जिनमें से कमर और पैर में गंभीर चोट आने के कारण तीन शिष्यों को भर्ती किया गया है, जबकि अन्य घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद छोड़ दिया गया।
खुले आसमान के नीचे धरने पर बैठे
इधर, घटना से आहत शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने पुलिस-प्रशासन के व्यवहार के विरोध में अन्न-जल त्याग दिया है और त्रिवेणी मार्ग स्थित अपने शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए हैं। उनके साथ शिष्य भी धरने में शामिल हैं। शंकराचार्य पूरी रात खुले आसमान के नीचे धरने पर बैठे रहे। धरने के दौरान शंकराचार्य ने कहा कि जब तक प्रशासन मौके पर आकर उनसे माफी नहीं मांगता, तब तक वे अन्न–जल ग्रहण नहीं करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने जानबूझकर उन्हें संगम स्नान से रोका और उनकी मौजूदगी में साधु-संतों के साथ मारपीट की गई।
कांग्रेस पार्टी के नेता पहुंचे मिलने
एसआरएन अस्पताल में भर्ती शिष्यों में शिव शक्ति, दंगल सिंह और डॉ. देवी प्रसाद पचौरी शामिल हैं। चिकित्सकों के अनुसार शिव शक्ति और डॉ. पचौरी को कमर में जबकि दंगल सिंह को पैर में चोट आई है। ईएमओ डॉ. सत्य प्रकाश ने बताया कि सोमवार को एक्सरे रिपोर्ट आने के बाद चोटों की गंभीरता स्पष्ट हो सकेगी। उधर, इस घटना को लेकर सियासी हलचल भी तेज हो गई है। दिन में कांग्रेस कमेटी के महासचिव विवेकानंद पाठक और देर रात पूर्व विधायक अनुग्रहण नारायण सिंह शंकराचार्य से मिलने उनके शिविर पहुंचे।
शिष्यों का बड़ा आरोप
दूसरी ओर, शंकराचार्य के शिष्यों स्वामी वैष्णानंद, प्रकाश पारिक, रजनीश दुबे और बलराम तिवारी ने पुलिस पर दुर्व्यवहार का आरोप लगाया है। शिष्यों का कहना है कि पुलिस ने उन्हें जबरन हटाकर घंटों बेवजह बैठाए रखा। धरने के दौरान संत समाज के अन्य लोग भी मौके पर मौजूद रहे। इसी बीच कंप्यूटर बाबा रथ के सामने लेट गए और प्रशासन से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।उन्होंने कहा कि जब तक प्रशासन क्षमा नहीं मांगता, तब तक धरना जारी रहेगा।
नई परंपरा की शुरुआत
मामले पर संत समाज की ओर से मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। स्वामी अधोक्षजानंद ने कहा कि माघ मेले जैसे विशाल आयोजन में किसी नई परंपरा की शुरुआत शास्त्र सम्मत नहीं कही जा सकती। वहीं, महंत रविंद्र पुरी ने कहा कि संत समाज को प्रशासन का सहयोग करना चाहिए और भीड़ के समय ऐसे कदमों से बचना चाहिए, जिससे व्यवस्था प्रभावित हो।