ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई का अंतिम संस्कार 9 जुलाई 2026 को मशहद में होगा। ईरान ने भारत के BJP और कांग्रेस दोनों के अध्यक्षों को न्योता भेजा है। ईरान सरकार ने आधिकारिक कार्यक्रम घोषित किया है। मशहद में इमाम रजा की दरगाह पर सुपुर्द-ए-खाक जुलाई से तेहरान में सार्वजनिक श्रद्धांजलि शुरू हो चुकी है। ईरान ने भारत के दोनों प्रमुख दलों के अध्यक्षों को आमंत्रित किया है। BJP अध्यक्ष नितिन नबीन को न्योता मिला है। वहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को भी न्योता भेजा गया।
इसके अलावा विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा और बिहार के गवर्नर लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन भी भारत की तरफ से शामिल होंगे। मोदी को भी ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने न्योता भेजा था, पर उनका जाना मुश्किल माना जा रहा है।
युद्ध के कारण 4 महीने टला अंतिम संस्कार
28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमले में तेहरान में खामनेई की मौत हो गई थी। पहले 4 मार्च को अंतिम संस्कार तय था, पर युद्ध के कारण टालना पड़ा। अब मुहर्रम के दौरान अंतिम विदाई हो रही है, जो शिया कैलेंडर में शोक का पवित्र महीना है। 2 करोड़ लोगों के जुटने की उम्मीद है। खामनेई ने 1989 से 2026 तक 37 साल ईरान की कमान संभाली। उनकी अंतिम विदाई में 2 करोड़ लोगों के जुटने का अनुमान है। पाकिस्तान, अफगानिस्तान, भारत, बांग्लादेश और कश्मीर से भी लोग पहुंचेंगे।
मशहद में ही क्यों दफन?
मशहद खामनेई का गृह नगर है और यहां शिया मुसलमानों के 8वें इमाम, इमाम रज़ा की दरगाह है। ये खामनेई की अंतिम इच्छा भी थी। 9 जुलाई को मशहद में खामनेई को सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। BJP अध्यक्ष नितिन नबीन और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को ईरान ने न्योता भेजा है। युद्ध के कारण 4 महीने की देरी के बाद अब मुहर्रम में उनकी अंतिम विदाई हो रही है। भारत की कूटनीतिक मौजूदगी इस दौरान अहम मानी जा रही है।