बाबरी मस्जिद को लेकर देश में एक बार फिर नया संग्राम शुरू हो गया है। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में निलंबित विधायक हुमायूं कबीर द्वारा बाबरी जैसे ढांचे की नींव रखे जाने के बाद माहौल गर्म हो गया। पूरे राज्य में राजनीतिक तूफान उठ खड़ा हुआ है। इसी बीच अयोध्या से पूर्व पक्षकार इकबाल अंसारी का बड़ा बयान आया, जिसने सियासत की दिशा ही बदल दी। उन्होंने साफ कहा कि बाबर उनके लिए कोई मसीहा नहीं और चुनाव के वक्त ऐसे मुद्दों को हवा देना गलत है। यह बयान देशभर में चर्चा का केंद्र बन चुका है।
बंगाल में गदर, हुमायूं का दावा- ये मेरा अधिकार
हुमायूं कबीर ने नींव रखते हुए कहा कि मस्जिद बनाना उनका संवैधानिक अधिकार है और कोई भी उन्हें रोक नहीं सकता। उन्होंने बताया कि परियोजना में मस्जिद के साथ एक अस्पताल, अतिथि गृह और हॉल भी शामिल है। बंगाल की बड़ी मुस्लिम आबादी के बीच इस मुद्दे को उछालने से राजनीतिक माहौल और भड़क गया है। हुमायूं का दावा है कि उनके खिलाफ दर्ज केस राजनीतिक हैं और निर्माण कार्य नहीं रुकेगा। बंगाल में इस कदम को लेकर लगातार विरोध और समर्थन दोनों दिख रहे हैं, जिससे सियासी तापमान तेजी से बढ़ा है।
अयोध्या का स्वर- इकबाल अंसारी का शांत लेकिन बड़ा संदेश
इकबाल अंसारी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला मुसलमानों ने सम्मान के साथ स्वीकार किया और राम मंदिर शांति से बनकर तैयार हो गया। अब पुराने घाव कुरेदने की जरूरत नहीं और न ही काला दिवस मनाने का कोई मतलब रह गया है। उन्होंने कहा कि चुनाव आते ही कुछ लोग ऐसी बहसें छेड़ते हैं ताकि भावनाओं को भटकाया जा सके। उनका यह बयान मुस्लिम समाज के अंदर नई सोच का संकेत माना जा रहा है। कई लोग इसे एक सकारात्मक संदेश के रूप में देख रहे हैं, जो विवाद को शांत करने की दिशा में बड़ा कदम बन सकता है।
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राजनीति में बवाल- बीजेपी का हमला, नए आरोपों की बारिश
हुमायूं के कदम पर बीजेपी ने पश्चिम बंगाल सरकार को घेरा और इसे वोट बैंक की राजनीति बताया। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि कबीर पर कार्रवाई देर से हुई और यह पूरा विवाद चुनावी रणनीति का हिस्सा है। वहीं असम विधानसभा के उपाध्यक्ष नुमाल मोमिन ने भी कहा कि यह कदम समाज को गलत दिशा में ले जाने वाला है। उनका कहना है कि यह मुद्दा राजनीतिक लाभ के लिए खड़ा किया गया है, जबकि देश को इससे दूर रहना चाहिए।