Ayodhya Ram Mandir Donation Row: अयोध्या के राम मंदिर में दान राशि से जुड़े कथित चोरी के मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच जारी है। जांच से जुड़े सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, कथित अनियमितता नोटों की गिनती के दौरान नहीं, बल्कि उससे पहले की प्रक्रिया में होने की आशंका जताई जा रही है। बताया जा रहा है कि दान पात्र से निकले नोटों को पहले व्यवस्थित किया जाता था और उसके बाद ही उन्हें मशीनों के माध्यम से गिना जाता था। मामले में जांच एजेंसियां पूरी प्रक्रिया की पड़ताल कर रही हैं।
नोटों को व्यवस्थित करने के दौरान गड़बड़ी की आशंका
सूत्रों के अनुसार, दान में प्राप्त नोटों को पहले मूल्य के आधार पर अलग-अलग कर उनकी गड्डियां तैयार की जाती थीं। इसके बाद नोट गिनने वाली मशीनों से उनकी गणना होती थी। प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि यदि किसी तरह की अनियमितता हुई है तो वह नोटों को सीधा और व्यवस्थित करने की प्रक्रिया के दौरान हुई होगी, न कि मशीन से गिनती के समय। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों से होगी पूछताछ
सूत्रों के मुताबिक, अभी तक संबंधित एसबीआई कर्मचारियों के बयान दर्ज नहीं किए गए हैं। संभावना है कि इस सप्ताह बैंक से जुड़े कर्मचारियों, पूर्व प्रबंधक गोविंद मिश्र और ट्रस्ट से जुड़े अनिल मिश्रा से पूछताछ की जाएगी। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि पूरी प्रक्रिया में किस स्तर पर निगरानी रखी जाती थी और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका क्या रही।
आउटसोर्स कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
जांच में यह जानकारी भी सामने आई है कि गिरफ्तार किए गए सभी आरोपी प्रत्यक्ष रूप से न तो ट्रस्ट और न ही बैंक के कर्मचारी थे। उन्हें एक निजी एजेंसी के माध्यम से आउटसोर्स किया गया था। इन कर्मचारियों का काम दान पात्र से निकले मुड़े हुए नोटों को सीधा करना, उन्हें मूल्य के अनुसार अलग-अलग रखना और मशीन से गिनती के लिए तैयार करना था। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि इन कर्मचारियों की नियुक्ति, प्रशिक्षण और निगरानी की व्यवस्था किस प्रकार की गई थी।
एसआईटी हर पहलू की कर रही जांच
सूत्रों के अनुसार, नोटों की गिनती की निगरानी करने वाले कुछ आउटसोर्स कर्मियों और पूर्व बैंक अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। इसके अलावा, बैंक और ट्रस्ट के बीच हुए समझौते (एमओयू) से जुड़े दस्तावेजों तथा भर्ती प्रक्रिया की भी जांच की जा रही है। एसआईटी का उद्देश्य पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट करना है कि यदि कोई अनियमितता हुई है तो उसके लिए जिम्मेदार कौन है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और आधिकारिक निष्कर्ष सामने आना बाकी है।