अयोध्या में धर्मध्वज आरोहण के ऐतिहासिक आयोजन के बाद राम मंदिर परिसर की बनावट, द्वारों और दरवाजों को लेकर लोगों में उत्सुकता और बढ़ गई है। 70.5 एकड़ में फैले मंदिर परिसर में कुल 44 द्वार बनाए गए हैं, जिनमें से केवल 18 पर ही वास्तविक दरवाजे लगे हैं। शेष द्वार संरचना और मार्गों का हिस्सा हैं। ऐसे में द्वार और दरवाजों के बीच अंतर को समझना श्रद्धालुओं के लिए रोचक बन गया है।
राम मंदिर में बने कुल 44 द्वार
राम मंदिर का विशाल परिसर 44 द्वारों के साथ बनाया गया है, जो मंदिर की संरचना, मार्गों और विभिन्न हिस्सों को जोड़ते हैं। ये द्वार मंदिर के वास्तुशिल्प का हिस्सा हैं और श्रद्धालुओं के आवागमन को सरल बनाने के उद्देश्य से डिजाइन किए गए हैं।
18 दरवाजों का विशेष महत्व
इन 44 द्वारों में से 18 द्वार ऐसे हैं जिनमें असली दरवाजे लगाए गए हैं। इनमें से 14 दरवाजों पर स्वर्ण जड़ित परत चढ़ाई गई है, जो उनकी भव्यता को बढ़ाती है। बाकी चार दरवाजे स्टोर एरिया में हैं, जिन्हें मजबूत लकड़ी पर वार्निश करके बनाया गया है।
खास सागौन की लकड़ी से तैयार किए गए दरवाजे
मंदिर के भूतल में लगाए गए सभी दरवाजे सागौन की विशेष किस्म की लकड़ी से तैयार किए गए हैं। इन दरवाजों पर आकर्षक नक्काशी और धातु की सजावट की गई है, जो मंदिर की पारंपरिक शैली को आधुनिक शिल्पकारी के साथ जोड़ती है।
भक्तों को प्रवेश सिर्फ मुख्य द्वार से
हालांकि मंदिर में 44 द्वार मौजूद हैं, लेकिन भक्तों के लिए प्रवेश केवल एक मुख्य मार्ग से ही तय किया गया है। सुग्रीव किला की ओर से यह प्रवेश मार्ग बनाया गया है। इसके अलावा राम जन्मभूमि पथ, भक्ति पथ और राम पथ नाम से तीन विशेष मार्ग भी विकसित किए गए हैं।
द्वार और दरवाजों का अंतर समझें
द्वार केवल मार्ग और संरचना दर्शाते हैं, जिन पर वास्तविक दरवाजे नहीं होते। वहीं दरवाजे वे हैं जिन्हें खोला या बंद किया जा सकता है और जिन पर लकड़ी, धातु या सोने की परत चढ़ाई गई है। यही अंतर राम मंदिर में बने 44 द्वार और 18 दरवाजों को अलग पहचान देता है।