अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में भक्तों के चढ़ावे की चोरी के आरोपों के बाद आयोजित 10 दिवसीय प्रायश्चित एवं शुद्धिकरण अनुष्ठान शुक्रवार को पूर्णाहुति के साथ संपन्न हो गया। धार्मिक परंपराओं के अनुसार आयोजित इस अनुष्ठान में वैदिक मंत्रोच्चार, हवन, रुद्राभिषेक और विशेष पूजन किया गया। मंदिर ट्रस्ट के अनुसार, इसका उद्देश्य मंदिर परिसर की धार्मिक पवित्रता की पुनर्स्थापना और हुई घटना के लिए प्रायश्चित करना था।
10 दिन चला अनुष्ठान
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से 15 जुलाई से शुरू किए गए इस विशेष अनुष्ठान का समापन शुक्रवार को पूर्णाहुति के साथ हुआ। ट्रस्ट के अनुसार, यह धार्मिक आयोजन मंदिर की परंपराओं और वैदिक विधि-विधान के अनुरूप संपन्न कराया गया। अनुष्ठान का उद्देश्य मंदिर परिसर की पवित्रता को पुनः स्थापित करना और धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन करना था।
वैदिक विधि से हुआ हवन
अनुष्ठान के अंतिम दिन मंदिर की यज्ञशाला में विशेष हवन और पूजा का आयोजन किया गया। वैदिक आचार्यों के मंत्रोच्चार के बीच विधिवत आहुतियां दी गईं। इस दौरान मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास और कृष्ण मोहन ने यजमान के रूप में अनुष्ठान में भाग लिया। पूरे कार्यक्रम का संचालन वैदिक परंपराओं के अनुरूप किया गया।
70 वैदिक आचार्यों की सहभागिता
ट्रस्ट के अनुसार, इस 10 दिवसीय अनुष्ठान में अयोध्या सहित विभिन्न स्थानों से आए लगभग 70 वैदिक आचार्यों ने भाग लिया। अनुष्ठान के दौरान रुद्राभिषेक, रामार्चा पूजा, वैदिक मंत्रोच्चार और हवन जैसे धार्मिक अनुष्ठान किए गए। वहीं, रामलला के मुख्य पुजारी द्वारा पूरे समय विष्णु सहस्रनाम का पाठ भी किया गया, जिससे पूरे वातावरण को वैदिक परंपराओं के अनुरूप बनाए रखा गया।
परंपरा के अनुसार हुआ प्रायश्चित
ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यदि मंदिर में चोरी या पूजा-पद्धति से जुड़ी कोई गंभीर घटना होती है, तो प्रायश्चित और शुद्धिकरण अनुष्ठान कराया जाता है। इसी परंपरा का पालन करते हुए यह आयोजन किया गया। अनुष्ठान के समापन पर सामुदायिक भोज का भी आयोजन हुआ, जिसमें स्थानीय ब्राह्मणों को भोजन कराया गया।
जांच अब भी जारी
यह पूरा आयोजन राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के आरोपों के बाद शुरू हुई जांच के बीच संपन्न हुआ। मामले में सरकारी स्तर पर विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया था और कानूनी कार्रवाई भी शुरू की गई। इस मामले में कई लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि जांच एजेंसियां अभी भी पूरे प्रकरण की जांच कर रही हैं। ट्रस्ट का कहना है कि धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए मंदिर की गरिमा और पवित्रता बनाए रखना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।