Ayodhyas Dhannipur Mosque: अयोध्या के धन्नीपुर गांव में बनाई जाने वाली मस्जिद को लेकर लंबे समय से चल रही संशय की स्थिति के बीच अब एक संभावित समय सीमा सामने आई है। इंडो-इस्लामिक कल्चरल फ़ाउंडेशन (IICF) के अध्यक्ष ज़फर फ़ारूकी ने बताया कि यदि सब कुछ योजना के अनुसार चलता रहा और अयोध्या विकास प्राधिकरण (ADA) दिसंबर के अंत तक जमा होने वाले संशोधित लेआउट प्लान को मंजूरी दे देता है, तो मस्जिद निर्माण का काम अप्रैल 2026 के आसपास शुरू हो सकता है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल के निलंबित TMC विधायक हुमायूं कबीर द्वारा ‘बाबरी’ के नाम पर नई नींव रखने के दावे ने राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया है। 2019 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मस्जिद के लिए धन्नीपुर में पांच एकड़ जमीन आवंटित की गई थी, लेकिन अब भी परियोजना को लेकर कई प्रश्न बने हुए हैं।
प्लान खारिज, डिजाइन में बदलाव
ज़फर फ़ारूकी ने बताया कि मस्जिद का पहला लेआउट प्लान ADA ने खारिज कर दिया था। इसके बाद समुदाय की मांगों को ध्यान में रखते हुए आधुनिक डिजाइन की जगह पारंपरिक ढांचा अपनाने का निर्णय लिया गया। ट्रस्ट के मुताबिक तकनीकी कारणों से आवंटित जमीन वास्तविक रूप में करीब चार एकड़ ही निकल पाई है, जिस वजह से परियोजना को संभवतः चरणबद्ध तरीके से अलग-अलग स्थानों पर भी विकसित किया जा सकता है। हालांकि ट्रस्ट ने साफ किया कि धन्नीपुर की लोकेशन अयोध्या शहर से थोड़ी दूरी पर होने के बावजूद मस्जिद की जगह बदलने की कोई संभावना नहीं है।
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कम फंड, लंबी राह
फारूकी के अनुसार मस्जिद, वज़ूखाने और परिसर के अन्य निर्माण कार्यों पर लगभग 65 करोड़ रुपये खर्च आने का अनुमान है, लेकिन फिलहाल ट्रस्ट के पास मुश्किल से तीन करोड़ रुपये ही जुट पाए हैं। दान की धीमी गति भी परियोजना की प्रगति को प्रभावित कर रही है। मस्जिद परिसर में अस्पताल, कम्युनिटी किचन और शैक्षणिक संस्थानों का विकास भी प्रस्तावित है, जिसके लिए अतिरिक्त फंडिंग की आवश्यकता होगी। IICF का कहना है कि एडीए की मंजूरी मिलते ही प्रयास तेज किए जाएंगे, लेकिन परियोजना में आगे बढ़ने के लिए सामाजिक और आर्थिक सहयोग बेहद जरूरी है।