बलिया के आयुष यादव हत्याकांड में वो मोड़ तब आया, जब टूटे हुए परिवार की आवाज़ कैमरे से निकलकर सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंच गई। आयुष की बहन की आंखों में आंसू थे और सवाल भी कि इंसाफ कब मिलेगा। आरोप लग रहे थे कि कार्रवाई धीमी है। लेकिन जैसे ही मामला योगी आदित्यनाथ तक पहुंचा, तस्वीर बदलने लगी। कहा जाता है कि मुख्यमंत्री तक फाइल पहुंचते ही देर नहीं होती और इस केस में भी वही हुआ। बहन की बात पर तुरंत संज्ञान लिया गया और अफसरों को साफ निर्देश दिए गए कि लापरवाही नहीं चलेगी।
एक हत्या जिसने सरकार को परीक्षा में डाला
यह मामला सिर्फ एक हत्या नहीं रहा। 25 साल का आयुष यादव घर के पास टहल रहा था, तभी बाइक सवार बदमाशों ने उस पर गोलियां चला दीं। गंभीर हालत में उसे मऊ और फिर वाराणसी ले जाया गया, लेकिन जान नहीं बच सकी। इकलौते बेटे की मौत से परिवार बिखर गया। बहन प्राची यादव का दर्द कैमरे पर आया और यहीं से यह केस कानून-व्यवस्था की बड़ी परीक्षा बन गया। सरकार जानती थी कि अगर कार्रवाई में ढिलाई दिखी, तो सवाल और तेज होंगे।
योगी का आदेश और पुलिस का ताबड़तोड़ एक्शन
स्थिति की गंभीरता समझते हुए मुख्यमंत्री ने इंतजार नहीं किया। ऊपर से आदेश गया और बलिया पुलिस के साथ STF को तुरंत एक्टिव किया गया। रणनीति बनी, इनपुट मिले और उभांव थाना क्षेत्र में देर रात घेराबंदी हुई। खुद को फंसा देख बदमाशों ने फायरिंग की, जवाब में पुलिस ने नियंत्रित कार्रवाई की। इस ऑपरेशन में चार आरोपी पकड़े गए और पूछताछ में उन्होंने हत्या की बात कबूल की। हथियार और वाहन जब्त हुए और साफ हो गया कि अब यह केस रुकने वाला नहीं है।
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सरेंडर से लेकर सियासी हलचल तक
कार्रवाई यहीं नहीं रुकी। जिस रोबिन सिंह को मास्टरमाइंड बताया जा रहा था, उसने दबाव में आकर सरेंडर कर दिया। इस तेज एक्शन ने राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी। चर्चा है कि योगी सरकार की इस सख्ती ने विपक्ष को भी चौंका दिया, खासकर अखिलेश यादव खेमे में सवाल उठने लगे। आज आयुष यादव की बहन की आंखों में दर्द जरूर है, लेकिन भरोसा भी है कि उसकी आवाज़ बेअसर नहीं गई। यह कार्रवाई एक संदेश बन गई कि उत्तर प्रदेश में अब अपराध के बाद बच निकलना आसान नहीं है और वक्त पर फैसला लेने वाली सरकार क्या कर सकती है, यह सबने देख लिया।