आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत जारी आयुष्मान कार्ड को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि क्या इसे हर साल रिन्यू कराना पड़ता है। इसका सीधा जवाब नहीं है. आयुष्मान कार्ड को हर साल अलग से रिन्यू कराने की जरूरत नहीं होती। एक बार पात्र व्यक्ति या परिवार का कार्ड बन जाने के बाद यह तब तक वैध रहता है, जब तक लाभार्थी योजना की पात्रता में शामिल है। इलाज की पांच लाख रुपये सालाना की लिमिट अपने आप हर साल रिन्यू हो जाती है। इसके लिए न तो कोई आवेदन करना होता है और न ही कोई शुल्क देना पड़ता है। इसी भ्रम का फायदा उठाकर ठग लोगों को डराकर या लालच देकर अपने जाल में फंसाते हैं।
आयुष्मान कार्ड के नाम पर ठगी कैसे?
आयुष्मान कार्ड की लोकप्रियता बढ़ने के साथ ही इसके नाम पर ठगी के मामले भी तेजी से बढ़े हैं। ठग फोन कॉल करके कहते हैं कि आपका कार्ड रिन्यू होना है या आपका नाम नई लिस्ट में आ गया है। इसके बाद आधार नंबर ओटीपी या बैंक से जुड़ी जानकारी मांग ली जाती है। कई बार फर्जी मैसेज भेजकर लिंक पर क्लिक करने को कहा जाता है। जैसे ही व्यक्ति लिंक खोलता है मोबाइल हैक होने या बैंक खाते से पैसे निकलने का खतरा बढ़ जाता है। कुछ लोग खुद को सरकारी एजेंट बताकर कार्ड बनाने या अपडेट करने के नाम पर पैसे भी मांगते हैं।
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ठगी से कैसे रहें सतर्क?
आयुष्मान कार्ड से जुड़ी ठगी से बचने के लिए सतर्कता सबसे जरूरी है। सरकार या आयुष्मान योजना से जुड़ा कोई भी अधिकारी फोन कॉल या मैसेज के जरिए आधार ओटीपी या बैंक डिटेल नहीं मांगता। सोशल मीडिया या व्हाट्सएप के जरिए कार्ड बनवाने या रिन्यू कराने का कोई आधिकारिक तरीका नहीं है। अगर कोई व्यक्ति कार्ड बनवाने या रिन्यू के नाम पर पैसे मांगता है तो उसे फर्जी मानना चाहिए। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और अपनी निजी जानकारी किसी को साझा न करें।
कार्ड बनवाने का सही तरीका
आयुष्मान कार्ड बनवाने का केवल सरकारी और सुरक्षित तरीका ही अपनाना चाहिए। यह कार्ड सरकारी पोर्टल आधिकारिक आयुष्मान ऐप या नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर के जरिए बनाया जाता है। यहां पहले पात्रता की जांच होती है और उसके बाद ही कार्ड जारी किया जाता है। कार्ड बनने के बाद लाभार्थी इसे डाउनलोड कर सकता है और देशभर के सूचीबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों में कैशलेस इलाज का लाभ ले सकता है। अगर किसी तरह का संदेह हो तो सीधे आधिकारिक हेल्पलाइन या नजदीकी सरकारी केंद्र से जानकारी लेना ही सबसे सुरक्षित रास्ता है।