समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता आजम खान और उनके बेटे व पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम को मंगलवार को दो पैनकार्ड मामले में बड़ा कानूनी झटका लगा। एमपी–एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट ने दोनों को दोषी करार देते हुए 7 साल की कैद और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। कोर्ट का फैसला आते ही दोनों को मौके पर ही न्यायिक हिरासत में ले लिया गया। जिस समय फैसला सुनाया गया, अदालत परिसर की सुरक्षा पहले से ही बढ़ाई गई थी और सजा की घोषणा होते ही पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दोनों को अपनी कस्टडी में ले लिया।
दो PAN कार्ड बनवाने से जुड़ा मामला
यह पूरा मामला अब्दुल्ला आजम द्वारा दो अलग-अलग जन्मतिथियों के आधार पर दो PAN कार्ड बनवाने से जुड़ा था। जांच में सामने आया कि एक पैनकार्ड 1990 की जन्मतिथि पर बनाया गया था, जबकि दूसरा कार्ड 1993 की जन्मतिथि के आधार पर जारी हुआ। आरोप था कि यह दस्तावेजी हेरफेर राजनीतिक लाभ के उद्देश्य से की गई थी। अदालत का मानना था कि सरकारी दस्तावेजों में गलत जानकारी देकर बनवाने का अपराध गंभीर है और समाज के जिम्मेदार राजनीतिक पदों पर बैठे लोग यदि ऐसे काम करें तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए नुकसानदायक है।
गलत दस्तावेज तैयार करवाने में सहयोग
आजम खान पर यह भी आरोप था कि उन्होंने अपने बेटे को गलत दस्तावेज तैयार करवाने में सहयोग किया। अदालत ने अपने निर्णय में इस बात को भी ध्यान में रखा कि यह कोई साधारण गलती नहीं बल्कि योजनाबद्ध तरीके से किया गया कार्य था। इसी वजह से दोनों को कड़ी सजा सुनाई गई। फैसले के बाद कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इस सजा का असर सीधे तौर पर आजम खान के राजनीतिक भविष्य पर पड़ेगा क्योंकि वे पहले ही कई मामलों में अभियुक्त हैं और अब एक और सजायाफ्ता की सूची में शामिल हो गए हैं। यह फैसला समाजवादी पार्टी के लिए भी बड़ा झटका माना जा रहा है। पार्टी की ओर से हालांकि अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि यह फैसला आने वाले दिनों में रामपुर की सियासत को पूरी तरह बदल सकता है।