समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान की जेल से रिहाई के कुछ ही समय बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। शनिवार को ED की टीम केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवानों के साथ रामपुर जेल पहुंची और आजम खान को अपने साथ ले गई। इलाहाबाद हाईकोर्ट से दो पैन कार्ड मामले में जमानत मिलने और सजा निलंबित होने के बाद उनकी रिहाई हुई थी। अब ED उन्हें रविवार सुबह करीब 10 बजे अदालत में पेश कर हिरासत की मांग करने की तैयारी में है।
14 अक्टूबर को दर्ज हुआ था मामला
ED ने आजम खान के खिलाफ 14 अक्टूबर को मुकदमा दर्ज किया था। इससे पहले एजेंसी इस मामले में अगस्त में छापेमारी कर उनसे पूछताछ भी कर चुकी है। हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद आजम खान की जेल से रिहाई की उम्मीद थी, लेकिन जेल के बाहर पहुंची ED की टीम ने उन्हें अपने कब्जे में ले लिया। वहीं, उनके बेटे अब्दुल्ला आजम की रिहाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है।
जौहर यूनिवर्सिटी की संपत्तियों पर भी कार्रवाई
ED ने मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारतों को अटैच करने की जानकारी दी थी। एजेंसी के अनुसार, इन संपत्तियों का अनुमानित बाजार मूल्य करीब 1,170 करोड़ रुपये है। ED का आरोप है कि सार्वजनिक कार्यों के लिए जारी सरकारी धन का इस्तेमाल निजी विश्वविद्यालय के निर्माण में किया गया। एजेंसी ने आजम खान पर मंत्री पदों पर रहते हुए अपने प्रभाव के कथित दुरुपयोग का भी आरोप लगाया है। इन आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत में होना है।
यह भी देखेंःNew Air Force Chief: आशुतोष दीक्षित बने नए वायुसेना प्रमुख, ऑपरेशन सिंदूर में निभाई थी अहम भूमिका
आजम खान ने कानून व्यवस्था पर उठाए सवाल
जेल से बाहर आने के बाद आजम खान ने कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि अब कहने के लिए क्या बचा है और सवाल किया कि क्या मुस्लिम होने की यही सजा है। उन्होंने कहा कि बच्चों की शिक्षा के लिए स्कूल और विश्वविद्यालय बनाना क्या उनका अपराध था। उनके बयान के बाद यह मामला एक बार फिर राजनीतिक चर्चा में आ गया है।
अखिलेश यादव ने सरकार पर साधा निशाना
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आजम खान के समर्थन में सोशल मीडिया मंच X पर पोस्ट कर सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि आजम खान को बार-बार मुकदमों में उलझाकर जेल भेजा जा रहा है। अखिलेश ने लिखा कि समय बदलने पर सत्ता भी बदलती है और अन्याय की कार्रवाई अंततः उसके जिम्मेदार लोगों पर भारी पड़ सकती है। इससे पहले भी अखिलेश यादव आजम खान से जेल में मुलाकात कर चुके हैं और उनके खिलाफ दर्ज मामलों को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता चुके हैं।