
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान भले ही लंबे समय तक राजनीति के केंद्र में रहे हों, लेकिन उनके दिल में पार्टी संस्थापक मुलायम सिंह यादव की यादें आज भी ताज़ा हैं. सीतापुर जेल से 23 महीने बाद छूटकर घर लौटे आजम खान ने एक इंटरव्यू में मुलायम सिंह से अपने रिश्तों को याद किया और कहा कि “हम उनके आशिक और माशूक थे.”
मुलायम पर अटूट भरोसे की याद
अपने इंटरव्यू के दौरान आजम खान ने बताया कि मुलायम सिंह को उन पर इतना भरोसा था कि वह दस्तखत करने से पहले भी उनकी बात मान लेते थे. उन्होंने बताया कि एक बार उन्होंने कलम की चाहत जताई थी और मुलायम सिंह ने बिना सवाल किए जौहर यूनिवर्सिटी के रूप में उनकी यह ख्वाहिश पूरी कर दी. आजम खान का कहना है कि उन्हें राजनीति कभी रास नहीं आई. उनका सपना हमेशा से ही लेक्चरर बनने और बच्चों को पढ़ाने का था. नौकरी भी लग रही थी, लेकिन इमरजेंसी के दौरान हालात ऐसे बन गए कि उन्हें राजनीति में कदम रखना पड़ा. उस समय वह एलएलएम के अंतिम सेमेस्टर में थे और स्टूडेंट यूनियन के सेक्रेटरी भी थे. मजबूरी में शुरू हुई राजनीति ही उनकी ज़िंदगी की राह बन गई.
जौहर यूनिवर्सिटी ही मेरा असली सपना
आजम खान ने साफ कहा कि उनका दिल अब भी शिक्षा जगत में ही बसता है. उनका पूरा फोकस जौहर यूनिवर्सिटी को आगे बढ़ाने की ओर है. यही उनका सपना था और आज भी वह इसे ही अपना सबसे अहम प्रोजेक्ट मानते हैं. इसके साथ ही अपने ऊपर लगे आरोपों को लेकर आजम खान ने दो टूक कहा कि अगर किसी भी आरोप का सबूत सामने आ जाता है, तो वह जिम्मेदारी लेने से पीछे नहीं हटेंगे. उन्होंने कहा कि 50 साल की सियासत में उन्होंने अपने लिए कभी कुछ नहीं किया. जिन जमीनों को कब्जाने का आरोप उन पर लगाया गया है, वह उनकी बिरादरी के लोगों के पास थीं. यहां तक कि यूनिवर्सिटी परिसर की पौने चार बीघे जमीन के मामले की जानकारी भी उन्हें पहले से नहीं थी.
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आपसी विश्वास और रिश्ते ही सबसे बड़ी पूंजी- आजम
वहीं इस इंटरव्यू के दौरान कई बार आजम खान भावुक हो उठे. उन्होंने कहा कि मुलायम सिंह यादव जैसा नेता ना तो पहले हुआ और ना ही आगे होगा. उनके साथ बिताए पल, आपसी विश्वास और रिश्ते ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी हैं.