
समाजवादी पार्टी (सपा) के कद्दावर नेता आजम खान सीतापुर जेल से 23 महीने बाद रिहा हो गए हैं। वहीं समर्थकों की भारी भीड़ ने जेल से बाहर आते ही उनका जोरदार स्वागत किया। इस दौरान काला चश्मा पहने आजम खान अपने पुराने अंदाज में नजर आए और सीधा अपने गृहनगर रामपुर के लिए रवाना हो गए। आजम को लेने के लिए उनके बेटे अब्दुल्ला आजम और कई पार्टी नेता जेल के बाहर मौजूद थे।
72 मामलों में मिली जमानत, 104 मुकदमे अभी भी दर्ज
बता दें कि आजम खान को 72 मामलों में जमानत मिली है, लेकिन उनके खिलाफ अभी भी 104 मुकदमे दर्ज हैं। जेल से रिहाई के बाद सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है।
अखिलेश यादव का बड़ा दांव
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने आजम खान की रिहाई पर खुशी जताई और कोर्ट का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि “सपा सरकार बनने के बाद आजम खान के खिलाफ सभी झूठे मामले वापस ले लिए जाएंगे। आजम और समाजवादियों ने भाजपा के खिलाफ लंबे समय से लड़ाई लड़ी है, अब उन्हें न्याय मिलेगा।”
बसपा के अरमानों पर क्या पड़ेगा असर?
वहीं दूसरी ओर आजम खान की वापसी रामपुर और उत्तर प्रदेश की सियासत में बड़ा बदलाव ला सकती है। उनका राजनीतिक अनुभव और सपा में मजबूत पकड़ बसपा के लिए चिंता का सबब बनकर सामने आ सकती है। फैंस और समर्थक इसे ऐतिहासिक पल मान रहे हैं।
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बीजेपी नेताओं की प्रतिक्रिया
आजम खान की रिहाई को लेकर बीजेपी नेता और उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि “आजम खान चाहें सपा में रहें या बसपा में जाएं, 2027 में सपा-बसपा दोनों की हार तय है।” वही भाजपा नेता अपर्णा यादव ने साफ कर दिया है कि आजम की रिहाई में बीजेपी का कोई लेना-देना नहीं है और कोर्ट के निर्णय का सभी को सम्मान करना चाहिए।
राजनीतिक भविष्य पर फिलहाल चुप्पी
हालांकि जेल से बाहर आने के बाद आजम खान ने अपने राजनीतिक भविष्य पर कोई टिप्पणी नहीं की लेकिन सपा के लिए यह कदम निश्चित ही रणनीतिक है। अखिलेश यादव ने आजम खान की रिहाई को बड़े दांव के रूप में खेला है, जिससे पार्टी के भीतर और बाहर दोनों जगह राजनीतिक हलचल पैदा हो सकती है।