
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आज़म खान जेल से बेल पर बाहर आने के बाद फिर से सियासी चर्चाओं का केंद्र बन गए हैं। सवाल ये है कि क्या वो सपा में बने रहेंगे या फिर मायावती की बहुजन समाज पार्टी का दामन थामेंगे। इस बीच सपा नेता और मुरादाबाद के पूर्व सांसद डॉक्टर एसटी हसन का बड़ा बयान सामने आया है।
मुसलमान वोट पर नहीं पड़ेगा असर- एसटी हसन
एसटी हसन का कहना है कि अगर आज़म खान सपा छोड़ भी देते हैं, तो मुसलमान वोटों में कोई बड़ा बंटवारा नहीं होगा। उत्तर प्रदेश का मुस्लिम समाज अखिलेश यादव और सपा के साथ मजबूती से खड़ा है। इसके साथ ही हसन ने याद दिलाया कि पिछले चुनावों के नतीजे भी यही साबित करते हैं।
“बीजेपी को सिर्फ सपा हरा सकती है”
वहीं सपा सांसद रहे एसटी हसन का मानना है कि मौजूदा हालात में मुसलमानों की सबसे बड़ी प्राथमिकता बीजेपी को हराना है। उन्होंने कहा कि यह काम केवल सपा ही कर सकती है। उन्होंने साफ तौर पर कहना है कि “आजमखान बड़े नेता हैं, असर तो थोड़ा-बहुत होगा ही लेकिन मुसलमान सपा से नहीं हटेगा।”
आज़म और हसन के रिश्तों में तल्खी
इसके साथ ही एसटी हसन ने यह भी स्वीकार किया है कि उनके और आज़म खान के रिश्तों में कड़वाहट रही है। जिसको लेकर उन्होंने कहा कि “जो मेरे साथ हुआ, वो सबको पता है। बगैर खता के मुझे सजा मिली। अब दिल नहीं चाहता वहां जाने का।” हालांकि उन्होंने जोड़ा कि अगर आज़म का हुक्म होगा तो वह उनसे मिलने जरूर जाएंगे।
“पैदाइशी समाजवादी हैं आज़म खान”
इसके साथ ही हसन ने आज़म खान के बसपा में जाने की अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा है कि आज़म खान पैदाइशी समाजवादी इंसान हैं और वे सपा छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि आज़म पार्टी में रहकर उसे और मजबूत करेंगे।
फर्जी मुकदमों का आरोप
इस दौरान एसटी हसन ने आरोप लगाया कि आज़म खान को फंसाने के लिए उन पर झूठे मुकदमे किए गए। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने बेल देकर इंसाफ किया है और उम्मीद है कि आने वाले फैसलों में भी उन्हें न्याय मिलेगा।
देखा जाए तो आजम खान की रिहाई ने यूपी की सियासत को गर्म कर दिया है। हालांकि एसटी हसन जैसे सपा नेताओं को पूरा भरोसा है कि आज़म खान पार्टी नहीं छोड़ेंगे और सपा को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते रहेंगे।