अजरबैजान की कोर्ट ने एक बड़े विपक्षी नेता को राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव को हटाने की साजिश के आरोप में जेल भेज दिया है। उन्हें फरवरी के मध्य यानी 13 फरवरी 2026 तक प्री-ट्रायल डिटेंशन यानी न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया गया। 2000 से पॉपुलर फ्रंट पार्टी ऑफ अजरबैजान (पीएफपीए) का नेतृत्व कर रहे 59 साल के अली करिमली ने आरोपों को खारिज किया। रॉयटर्स से बात करते हुए उनके वकीलों ने कहा, ये फैसला राजनीति से प्रेरित है।
प्री-ट्रायल डिटेंशन में रखा गया
अजरबैजान की स्टेट सिक्योरिटी सर्विस (एसएसएस) ने शनिवार को करीमली के घर पर छापा मारा और बाद में उन्हें और पीएफपीए के दो सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया। उनमें से एक, मम्माद इब्राहिम, को भी 13 फरवरी तक प्री-ट्रायल डिटेंशन में रखा गया है।
1994 से 2019 तक राष्ट्रपति प्रशासन के प्रमुख रहे
करिमली के घर पर पुलिस ने 29 नवंबर को छापा मारा और उन्हें हिरासत में लिया था। कथित तौर पर यह गिरफ्तारी रामिज मेहदियेव के खिलाफ चल रही जांच से जुड़ी है, जो 1994 से 2019 तक राष्ट्रपति प्रशासन के प्रमुख रहे थे।
तख्तापलट की कोशिश में शामिल
मेहदियेव पर अक्टूबर में राज्य की सत्ता हथियाने, उच्च राजद्रोह और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगे, और फिलहाल वो हाउस अरेस्ट में हैं। सरकार का दावा है कि करिमली और उनके साथी इस कू-एटेम्प्ट (तख्तापलट की कोशिश) में शामिल थे। कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि हिरासत जांच सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने इसे विपक्ष पर हमले का हिस्सा बताया। वहीं अली की पार्टी ने समर्थकों से शांतिपूर्ण विरोध की अपील की है।