Azim Premji Career: अजीम प्रेमजी भारतीय आईटी उद्योग के जनक के रूप में जाने जाते हैं। अजीम प्रेमजी में वह नाम है, जिन्हें किसी पहचान की जरूरत नहीं है। अजीम प्रेमजी का आज जन्मदिन है और वह 80 साल के हो गए है। उनका जन्म 24 जुलाई, 1945 को हुआ था। अजीम प्रेमजी ने अपने शुरूआती जीवन में काफी उतार-चढ़ाव देखे हैं, जब वह पढ़ाई कर रहे थे, तभी उनके पिता की मृत्यु हो गई थी। उसी समय से अजीम प्रेमजी ने अपने पिता के कारोबार को संभाला था। अजीम प्रेमजी ने कर्ज में डूबी कंपनी को खूब आगे बढ़ाया है। आइए जानते हैं अजीम प्रेमजी के बारे में।
कर्ज में डूबी कंपनी को बनाया दिग्गज ब्रांड
बता दें कि अजीम प्रेमजी अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करते थे, तभी अजीम प्रेमजी को 11 अगस्त, 1966 को अपनी मां का फोन कॉल आया, जिसमें उन्हें पिता की मृत्यु का संदेश दिया गया, जिसके तुरंत बाद उन्होंने भारत आकर पिता के कारोबार की कमान संभालनी पड़ी। जब अजीम प्रेमजी ने कारोबार को अपने हाथों में लिया था, तब कंपनी काफी कर्ज में थी, जिसे लेकर अजीम प्रेमजी ने नए सिरे से काम करना शुरू किया और उसे एक नई पहचान दी।
आईटी सेक्टर में बनाई पहचान
अजीम प्रेमजी ने जब कारोबार को अपने हाथ में लिया था, तब उस समय उनके कंपनी का नाम वेस्टर्न इंडिया वेजिटेबल प्रोजक्ट लिमिटेड था, जो आगे चलकर 1977 में ‘विप्रो’ बन गई। अजीम प्रेमजी ने 1980 के दशक में भारत में उभरते आईटी सेक्टर में कदम रखा। उन्होंने कंप्यूटर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट पर फोकस किया और विप्रो को इंटरनेशनल लेवल पर पहुंचा दिया। अब विप्रो कंपनी भारत की टॉप आईटी कंपनियों में से एक है, जिसका मार्केट कैप 3 ट्रिलियन से अधिक है। इस कंपनी ने लाखों लोगों को रोजगार दिया है।
देश के बड़े दानवीर लोगों में आता है नाम
बता दें कि अजीम प्रेमजी का नाम सिर्फ एक सफल बिजनेसमैन के लिए नहीं जाना जाता है, बल्कि अजीम प्रेमजी भारत के सबसे बड़े परोपकारी व्यक्तियों में से एक हैं। फोर्ब्स के अनुसार, उनकी कुल संपत्ति 12.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर है, उन्होंने अपनी संपत्ति का बड़ा हिस्सा दान करने का फैसला किया है। अब तक वह करीब 15 अरब डॉलर से ज्यादा की राशि दान कर चुके हैं, जो किसी भी भारतीय द्वारा दान की गई सबसे बड़ी राशि है।