लखनऊ। प्रयागराज माघ मेले में संगम स्नान को लेकर चल रहे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर योग गुरु बाबा रामदेव ने अलग ही अंदाज में नसीहत दी है। योग गुरु ने कहा कि सनातन के शत्रु बहुत हैं, आपस में विवाद न करें। कुछ लोग हिंदुस्तान में गजवा ए हिंद कायम करना चाहते हैं। शंकराचार्य जी को हम भगवान स्वरूप में उनको विग्रहवान मानते हैं तो किसी रूप में भी शंकराचार्य जी द्वारा विवाद न हो ऐसी अपेक्षा करते हैं।
योग गुरु बाबा रामदेव अयोध्या स्थित राम वल्लभा कुंज मंदिर पहुंचे। यहां सुबह योग शिविर के माध्यम से लोगों को सनातन धर्म-संस्कृति की रक्षा के प्रति जागरूक किया। इसके बाद राम जन्मभूमि पर विराजमान रामलला के दर्शन किए। इस दौरान मीडिया से बातचीत में योग गुरु ने कहा कि अयोध्या हमारा पवन धाम है। श्रीराम की जन्मभूमि हमारा महा तीर्थ है। जिसे विदेशी आक्रांताओं ने क्रूरता और अत्याचारों से यहां बहुत विध्वंस मचाया था। इसलिए तीर्थराज प्रयाग में स्नान करने के बाद अयोध्या के राम वल्लभा कुंज में सनातन के गौरव पुरुष गुरु देव वेदांती महाराज के जन्म दिवस पर उनके आशीर्वाद प्राप्त करने अयोध्या आए हैं।
प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के विवाद पर योग गुरु ने कहा कि तीर्थों में सनातनियों की चाहे वह भक्त, संन्यासी हो, साधु, संत, महात्मा, आचार्य, महामंडलेश्वर, जगद्गुरु जैसे तमाम तरह की उपाधियां हैं। शंकराचार्य जी हमारे भगवान के स्वरूप में उनको विग्रहवान मानते हैं। किसी रूप में भी शंकराचार्य जी द्वारा विवाद न हो इसी अपेक्षा करते हैं।
योग गुरु ने कहा कि वह साधु हैं तो वह विवाद किस बात का करेंगे। कम से कम धर्म स्थान पर कोई साधु विवाद नहीं कर सकता है। कोई पाप अधर्म अन्याय हो रहा हो तो वहां पवित्र स्थान पर दुष्ट का विनाश करेंगे। तीर्थ में किस बात का विवाद, यहां न तो कोई स्नान का और न पालकी का विवाद होना चाहिए। वह साधु किस बात का जो अहंकार करे। साधु बनता भी वही है जिसने अपने अभिमान को मिटा दिया हो। साधुता की पहली सीढ़ी निअभिमानित है। इसलिए प्रकार का अहम और दूसरा तत्व सामने नहीं रखना चाहिए, इससे अपयश होता है।
योग गुरु ने कहा कि हमारे विरोधी तो दूसरे, सिर तन से जुदा करने वाले बहुत हैं। गजवा ए हिंद हिंदुस्तान में कायम करना चाहते हैं। जो अलग-अलग प्रकार से यहां पर ईसाईकरण कर रह हैं तो कोई इस्लामीकरण कर रहा है। अलग-अलग प्रकार के उल्टे-पुलटे कामों में लगा हुआ है। आज सनातन के शत्रु बाहर भी बहुत हैं। उन्हीं से लड़ ले आपस में न लड़ें।