Baba Ramdevs Big Allegation: स्वतंत्रता दिवस के मौके पर योग गुरु बाबा रामदेव ने युवाओं के आंदोलनों और सरकारी भर्तियों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी नौकरियों में इंटरव्यू के दौरान बड़े स्तर पर अनियमितताएं होती हैं। रामदेव ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं होने से युवाओं में नाराजगी बढ़ रही है और यही वजह है कि अलग-अलग जगहों पर आंदोलन देखने को मिल रहे हैं।
इंटरव्यू प्रक्रिया पर उठाए सवाल
बाबा रामदेव ने सरकारी नौकरी के इंटरव्यू को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि इंटरव्यू के दौरान 90 से 99 प्रतिशत तक घोटाला होता है। उनका आरोप है कि कई बार चयन प्रक्रिया में योग्यता के बजाय उम्मीदवारों की पहचान, संगठन, जाति, वर्ग या समुदाय को प्राथमिकता दी जाती है। उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था में योग्य युवाओं के साथ अन्याय होता है।
लोकतंत्र और न्याय के खिलाफ
रामदेव ने भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लोकतंत्र और न्याय के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि देश में एक तरफ ‘सत्यमेव जयते’ की बात की जाती है, लेकिन दूसरी ओर यदि भर्ती में पहले से चयन तय हो जाए या पैसे के आधार पर नियुक्तियां हों तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने युवाओं की नाराजगी को इसी तरह की समस्याओं से जोड़ते हुए व्यवस्था में सुधार की जरूरत बताई।
युवाओं के आंदोलन पर भी बोले
योग गुरु ने कहा कि सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता नहीं होने से युवाओं में असंतोष बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि अगर व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो उन्हें भी आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह आंदोलन के नाम पर अराजकता का समर्थन नहीं करते। उनके मुताबिक, लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें उठाना अलग बात है, लेकिन कानून-व्यवस्था बिगाड़ना सही नहीं है।
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सरकार को दी सुधार की चेतावनी
बाबा रामदेव ने कहा कि देश में भ्रष्टाचार और कथित घोटालों की समस्या को गंभीरता से ठीक करने की जरूरत है। उन्होंने व्यवस्था में सुधार की अपील करते हुए चेतावनी दी कि अगर समय रहते बदलाव नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी नौकरी की भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाना युवाओं के भरोसे के लिए जरूरी है।
दोबारा आंदोलन की नौबत न आए
रामदेव ने अपने बयान में व्यवस्था से जुड़े लोगों को सुधार करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि अगर समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है, जब उन्हें दोबारा आंदोलन करना पड़े। हालांकि, सरकारी नौकरियों के इंटरव्यू में 90 से 99 प्रतिशत घोटाले के उनके दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इसे उनके आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।