सनातन धर्म में पितृ पक्ष का अत्यधिक महत्व है। यह अवधि पूर्वजों की आत्मा की शांति और तृप्ति के लिए समर्पित होती है। मान्यता है कि इन 15 दिनों में कोई भी शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किया जाता। लेकिन सवाल यह उठता है कि अगर पितृ पक्ष के दौरान किसी घर में बच्चे का जन्म हो जाए तो उसे अशुभ माना जाता है या शुभ? शास्त्रों और मान्यताओं के अनुसार ऐसे बच्चों का जीवन कैसा होता है, आइए विस्तार से जानते हैं।
पितृ पक्ष 2025 की अवधि
इस वर्ष पितृ पक्ष 7 सितंबर से 21 सितंबर 2025 तक रहेगा। इस दौरान परिवारजन पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध कर्म कर अपने पितरों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। इन तिथियों में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे कार्य वर्जित रहते हैं।
पितृ पक्ष में जन्मे बच्चे अशुभ या शुभ?
ज्योतिषाचार्यों और मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष में जन्म लेना अशुभ नहीं बल्कि अत्यंत शुभ होता है। ऐसे बच्चों को पितरों का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। माना जाता है कि ये शिशु उसी कुल के किसी पूर्वज का पुनर्जन्म होते हैं, जो अपने ही परिवार में जन्म लेते हैं। इनका भाग्य उज्ज्वल होता है और जीवन में सफलता के कई अवसर प्राप्त होते हैं।
पितृ पक्ष में जन्मे बच्चों का स्वभाव
ऐसे बच्चे प्रखर बुद्धिमान और रचनात्मक होते हैं।
खुशमिजाज और सकारात्मक सोच वाले होते हैं।
परिवार के प्रति गहरा लगाव रखते हैं।
बड़े फैसले लेने में सक्षम होते हैं और उम्र से अधिक परिपक्व सोच रखते हैं।
इन बच्चों के स्वभाव के कारण ये जीवन में बड़ा नाम और मान-सम्मान कमाते हैं।
कुंडली और चंद्रमा का प्रभाव
ज्योतिष मान्यता के अनुसार, पितृ पक्ष में जन्मे बच्चों की कुंडली में चंद्रमा की स्थिति कमजोर हो सकती है। इसकी वजह से उनका मन स्थिर नहीं रहता और वे ज्यादा सोचने की आदत (Overthinking) के शिकार हो जाते हैं।
उपाय:
सोमवार को चंद्रमा की रोशनी में बैठना।
चांदी के गिलास में पानी पीना।
चंद्रमा से जुड़े मंत्रों का जाप करना।
इन छोटे उपायों से मानसिक शांति और सफलता दोनों प्राप्त की जा सकती है।