6 month Baby Food : जब बच्चा 6 महीने का हो जाता है, तब केवल माँ का दूध उसकी सभी पोषण जरूरतों को पूरा नहीं कर पाता. इसलिए इस उम्र से माँ के दूध के साथ-साथ ठोस आहार (Complementary Feeding) शुरू किया जाता है। शुरुआत हमेशा हल्के, मुलायम और आसानी से पचने वाले भोजन से करनी चाहिए। एक समय में केवल एक नया भोजन दें और 2–3 दिन तक देखें कि बच्चे को किसी तरह की एलर्जी या परेशानी तो नहीं हो रही। अगर बच्चा भोजन अच्छी तरह खा रहा है, तो धीरे-धीरे उसकी मात्रा और खाने की विविधता बढ़ाई जा सकती है.
6 से 8 महीने में क्या खिलाएं?
इस उम्र में बच्चे को दिन में 2–3 बार नरम और मैश किया हुआ खाना दें. जैसे चावल की पतली खिचड़ी, दाल, मैश किया हुआ केला, उबला और मैश किया आलू, शकरकंद, कद्दू, गाजर, सेब की प्यूरी और दही। यदि परिवार अंडा खाता है, तो अच्छी तरह पका हुआ अंडा भी थोड़ी मात्रा में दिया जा सकता है। हर बार ताजा और साफ भोजन तैयार करें। माँ का दूध पहले की तरह जारी रखें.
8 से 10 महीने में क्या खिलाएं?
इस समय बच्चा थोड़े दानेदार भोजन को भी चबाने की कोशिश करता है। इसलिए थोड़ी गाढ़ी खिचड़ी, दलिया, सूजी, नरम रोटी को दाल में भिगोकर, पनीर, दाल, मौसमी फल और उबली सब्जियां दी जा सकती हैं। बच्चे को अपने हाथ से खाने की कोशिश करने दें ताकि उसकी पकड़ और खाने की आदत विकसित हो.
10 से 12 महीने में क्या खिलाएं?
अब बच्चा परिवार का अधिकांश खाना खा सकता है, बस भोजन बहुत तीखा, तला हुआ या सख्त नहीं होना चाहिए। चावल, दाल, सब्जी, दही, फल, पनीर और अच्छी तरह पकी हुई दालें दी जा सकती हैं। दिन में 3 मुख्य भोजन और 1–2 हल्के स्नैक्स देना अच्छा रहता है.
नमक और चीनी कब तक नहीं देनी चाहिए?
विशेषज्ञों की सलाह है कि 1 साल की उम्र तक बच्चे के खाने में अतिरिक्त नमक और चीनी नहीं मिलानी चाहिए। माँ का दूध और सामान्य खाद्य पदार्थों में पहले से ही प्राकृतिक रूप से पर्याप्त सोडियम और प्राकृतिक शर्करा होती है। अधिक नमक बच्चे की किडनी पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। वहीं ज्यादा चीनी देने से मीठा खाने की आदत, दांतों की समस्या और आगे चलकर मोटापे का खतरा बढ़ सकता है.
ध्यान रखने वाली बातें
बच्चे को शहद 1 साल की उम्र से पहले न दें। हमेशा ताजा और साफ भोजन खिलाएं. बच्चे को जबरदस्ती खाने के लिए मजबूर न करें. हर नया भोजन धीरे-धीरे शुरू करें और यदि किसी भोजन से एलर्जी, उल्टी, दस्त या सांस लेने में परेशानी जैसी समस्या दिखे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। सही समय पर सही आहार देने से बच्चे की वृद्धि, दिमाग का विकास और रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है.