राम मंदिर से जुड़े विवाद के बीच अब बदरी-केदार मंदिर समिति भी आरोपों के घेरे में आ गई है। सामाजिक कार्यकर्ता और वरिष्ठ अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने आरटीआई से मिली जानकारी के आधार पर दावा किया है कि समिति के कुछ सदस्यों ने टीए-डीए के नाम पर नियमों से हटकर भुगतान लिया। उनका आरोप है कि यह रकम श्रद्धालुओं के चढ़ावे से खर्च की गई। हालांकि इन आरोपों पर समिति की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया है।
बैठक कम, भुगतान ज्यादा होने का दावा
नेगी का कहना है कि मंदिर एक्ट के अनुसार यात्रा भत्ता केवल समिति या उपसमिति की आधिकारिक बैठकों में शामिल होने पर ही दिया जा सकता है। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान समिति के गठन के बाद एक साल से भी कम समय में बोर्ड की केवल एक बैठक हुई, लेकिन कुछ सदस्यों ने कई दौरों के नाम पर लाखों रुपये का भुगतान ले लिया। उन्होंने इसे नियमों के विपरीत बताते हुए जांच की मांग की है।
हेलीकॉप्टर और धाम यात्राओं पर भी सवाल
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि कुछ सदस्यों ने धाम यात्राओं, कपाट खुलने-बंद होने के कार्यक्रमों और अन्य आयोजनों को सरकारी कार्य दिखाकर टीए-डीए लिया। कुछ मामलों में हेलीकॉप्टर यात्रा का खर्च भी मंदिर कोष से दिए जाने का दावा किया गया है। साथ ही कुछ भुगतान पर लेखा शाखा की आपत्तियों के बावजूद रकम जारी किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
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अब जांच और जवाब का इंतजार
नेगी ने पूरे मामले में भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने पहले भी मंदिर कोष के खर्च को लेकर कई सवाल उठाए थे। इस बार भी उन्होंने कुछ अन्य वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। वहीं बदरी-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष का पक्ष जानने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। ऐसे में अब सभी की नजर इस बात पर है कि इन आरोपों की जांच में क्या सामने आता है और समिति की ओर से क्या सफाई दी जाती है।