Bagalamukhi Jayanti 2026: हिंदू धर्म में मां बगलामुखी को दस महाविद्याओं में से एक प्रमुख देवी माना जाता है। इन्हें शत्रुओं का नाश करने वाली और विपरीत परिस्थितियों को अपने पक्ष में करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। बगलामुखी जयंती के दिन भक्त विशेष पूजा-अर्चना कर उनकी कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। मान्यता है कि मां की उपासना से न केवल शत्रुओं पर विजय मिलती है, बल्कि जीवन में आने वाली बाधाएं भी दूर हो जाती हैं।
मां बगलामुखी का स्वरूप और महत्व
मां बगलामुखी का स्वरूप अत्यंत प्रभावशाली और रहस्यमय माना जाता है। वे पीले वस्त्र धारण करती हैं और पीले रंग को ही उनका प्रिय रंग बताया गया है। एक हाथ से वे शत्रु की जीभ पकड़ती हैं और दूसरे हाथ से उसे दंडित करती हैं, जो इस बात का प्रतीक है कि वे विरोधियों की वाणी और शक्ति दोनों को नियंत्रित कर सकती हैं। इसलिए उन्हें “स्तंभन शक्ति” की देवी भी कहा जाता है।
कैसे हुई मां बगलामुखी की उत्पत्ति
पुराणों के अनुसार, एक समय पृथ्वी पर भयंकर तूफान और विनाश का संकट आ गया था। इस संकट से संसार को बचाने के लिए भगवान विष्णु ने तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर मां बगलामुखी प्रकट हुईं और उन्होंने अपनी शक्ति से उस प्रलयकारी तूफान को शांत कर दिया। तभी से उन्हें संकट निवारण और रक्षा की देवी के रूप में पूजा जाने लगा।
शत्रु पर विजय दिलाने वाली शक्ति
माना जाता है कि मां बगलामुखी की साधना से व्यक्ति अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त कर सकता है। उनकी पूजा विशेष रूप से उन लोगों द्वारा की जाती है जो न्यायिक विवाद, प्रतिस्पर्धा या जीवन में विरोधियों से जूझ रहे होते हैं। मां की कृपा से शत्रु की बुद्धि भ्रमित हो जाती है और उसके प्रयास निष्फल हो जाते हैं।
बगलामुखी जयंती पर कैसे करें पूजा
इस दिन पीले वस्त्र पहनकर मां की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। हल्दी, पीले फूल और बेसन के लड्डू का भोग अर्पित किया जाता है। “ॐ ह्लीं बगलामुख्यै नमः” मंत्र का जाप करने से विशेष लाभ मिलता है। श्रद्धा और नियम के साथ की गई पूजा से मां बगलामुखी की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।