
हिंदू धर्म में गाय को माता का स्थान प्राप्त है और उसे देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। बहुला चौथ का पर्व विशेष रूप से गाय और उसके बछड़े की पूजा के लिए मनाया जाता है। यह पर्व महिलाओं द्वारा अपने परिवार की सुख-शांति, संतान की लंबी उम्र और समृद्धि की कामना के साथ श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है।
आज मनाई जाएगी बहुला चौथ
बहुला चौथ 2025 में 12 अगस्त, मंगलवार को मनाया जाएगा। यह पर्व भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को आता है। इस दिन महिलाएं उपवास रखती हैं और विधिपूर्वक गौ पूजा करती हैं, जो न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
क्या है शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, चतुर्थी तिथि का आरंभ 12 अगस्त को सुबह 08:16 बजे से होगा और इसका समापन 13 अगस्त को सुबह 10:12 बजे पर होगा। पूजा का सबसे शुभ समय दोपहर या संध्या वेला में माना जाता है, जब गाय की पूजा कर व्रत कथा सुनी जाती है और आरती की जाती है।
ये पूजा मानी जाती है शुभ
गाय की पूजा बहुला चौथ पर इसलिए की जाती है क्योंकि उसे पृथ्वी पर दिव्य शक्तियों का प्रतीक माना गया है। मान्यता है कि इस दिन गाय की सेवा और पूजन करने से सभी रोग, दोष और पाप नष्ट हो जाते हैं। गाय को स्नान कराकर, चंदन, हल्दी, रोली, फूलों से सजाया जाता है और उसे गुड़, रोटी, हरी घास व मिठाई खिलाई जाती है।
रखती है निर्जला व्रत
इस दिन महिलाएं दिनभर निर्जल व्रत रखती हैं और संतान की मंगलकामना करती हैं। शाम को पूजा के बाद बहुला चौथ की पौराणिक कथा सुनी जाती है, जिसमें एक गौमाता के त्याग और धैर्य की कहानी होती है। कथा के माध्यम से यह संदेश दिया जाता है कि पशु भी संवेदना और श्रद्धा के पात्र हैं।
सयंम का त्योहार
बहुला चौथ के दिन भूमि पर सोने, संयम रखने और सात्त्विकता बनाए रखने का विशेष नियम होता है। मांसाहार, क्रोध, कटु वचन और असत्य से दूर रहना इस दिन पुण्य प्राप्ति के लिए आवश्यक माना जाता है। इस दिन श्रद्धा और नियम से किया गया व्रत घर में सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि लाता है।
धार्मिक आस्था का प्रतीक
बहुला चौथ का पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह हमें प्रकृति, पशु और जीवन के मूल्यों से जुड़ने की प्रेरणा देता है। इस दिन की गई गौ सेवा से पुण्य फल प्राप्त होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।