Bakrid 2026: बकरीद 2026 से पहले देश के कई राज्यों ने कुर्बानी को लेकर सख्त नियम और गाइडलाइंस जारी की हैं। प्रशासन ने साफ किया है कि खुले स्थानों पर पशु वध की अनुमति नहीं होगी और केवल अधिकृत जगहों पर ही कुर्बानी दी जा सकेगी। इसके साथ ही अलग-अलग राज्यों में विभिन्न जानवरों के वध को लेकर अलग कानूनी प्रावधान लागू हैं, जिनका उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई हो सकती है।
कई राज्यों में गोवंश के वध पर पूरी रोक
दिल्ली, उत्तर प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में गाय, बैल और बछड़ों के वध पर पूरी तरह कानूनी प्रतिबंध लागू है। इन राज्यों में बकरीद या किसी अन्य अवसर पर गोवंश की कुर्बानी देना गैरकानूनी माना जाता है। उत्तर प्रदेश का गोवंश संरक्षण कानून सबसे पुराने और सख्त कानूनों में गिना जाता है।
भैंस की कुर्बानी को कुछ राज्यों में अनुमति
देश के कुछ राज्यों में गाय के वध पर प्रतिबंध है, लेकिन भैंस की कुर्बानी की अनुमति दी गई है। बिहार, झारखंड, ओडिशा, तेलंगाना, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और गोवा जैसे राज्यों में भैंसों के वध को कानूनी अनुमति प्राप्त है। वहीं केरल, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में गोवंश वध को लेकर अलग नियम लागू हैं।
राजस्थान में ऊंट की कुर्बानी पर सख्ती
राजस्थान में ऊंट को राज्य पशु का दर्जा दिया गया है, जिसके चलते उसके वध पर पूरी तरह रोक लागू है। राज्य सरकार ने ऊंटों की घटती संख्या को देखते हुए यह कानून लागू किया था। इसके बाद कई इलाकों में वर्षों पुरानी ऊंट कुर्बानी की परंपरा भी बंद कर दी गई।
खुले में कुर्बानी देने पर कार्रवाई
अधिकांश राज्यों की नई गाइडलाइंस में कहा गया है कि सार्वजनिक स्थानों, सड़कों, पार्कों या रिहायशी इलाकों में पशु वध पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। प्रशासन ने साफ किया है कि केवल लाइसेंस प्राप्त बूचड़खानों या तय स्थानों पर ही कुर्बानी दी जा सकती है। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
जुर्माने का प्रावधान
प्रतिबंधित पशुओं की गैरकानूनी कुर्बानी देने पर कई राज्यों में गिरफ्तारी तक हो सकती है। ऐसे मामलों में पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, खाद्य सुरक्षा कानून और अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाती है। दोषी पाए जाने पर भारी जुर्माने के साथ जेल की सजा भी हो सकती है।