Balaghat Unknown Disease मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बिरसा और बैहर विकासखंड की अडोरी पंचायत के सुदूर बैगा आदिवासी गांवों में पिछले करीब एक महीने से बीमारी का प्रकोप बना हुआ है। बोनदारी, कोहनीमोर, भंडारी और कुंडेकसा गांवों में कई बच्चे और ग्रामीण तेज बुखार, उल्टी, दस्त और शरीर पर लाल चकत्ते जैसी समस्याओं से परेशान बताए जा रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक गांवों में बड़ी संख्या में बच्चे बीमार हैं, जिससे लोगों में चिंता का माहौल है। बीमारी की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है और स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांवों में पहुंचकर स्थिति का जायजा ले रही हैं।
ग्रामीणों ने 7 मौतों का किया दावा, प्रशासनिक पुष्टि बाकी
ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों ने बीमारी के चलते अब तक 7 लोगों की मौत होने का दावा किया है। इनमें बोनदारी गांव में समारू बैगा की 12 वर्षीय बेटी लमनीन और 2.5 वर्षीय बेटे संतोष, कुंडेकसा में मेहरू बैगा की 3 वर्षीय बेटी प्रीति और चमरू धुर्वे की करीब 1 वर्ष 8 महीने की बेटी पूजा की मौत की जानकारी दी गई है। अडोरी के सरपंच परसराम धुर्वे के अनुसार गुरुवार को अरविंद पिता चैतु धुर्वे, उम्र 4 वर्ष, की भी मौत हुई। हालांकि, इन मौतों की बीमारी से सीधी वजह और कुल संख्या की प्रशासनिक स्तर पर आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
दूषित पानी और संक्रमण की आशंका, जांच में जुटा स्वास्थ्य विभाग
प्रारंभिक स्तर पर दूषित पानी, भोजन या किसी संक्रमण को बीमारी की संभावित वजह माना जा रहा है। हालांकि बीमारी का वास्तविक कारण जांच के बाद ही सामने आएगा। स्वास्थ्य विभाग की टीम गांवों में पहुंचकर घर-घर जांच कर रही है। लोगों को दवाएं दी जा रही हैं और पानी के नमूने भी जांच के लिए लिए जा रहे हैं। अधिकारियों की निगरानी में बीमार बच्चों का इलाज स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पताल में कराया जा रहा है। ग्रामीण इलाका होने के कारण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच भी इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू बनी हुई है।
सरपंच ने शिविर में देरी का लगाया आरोप
अडोरी के सरपंच परसराम धुर्वे ने आरोप लगाया कि पंचायत के तीन गांवों में करीब एक महीने से बीमारी का असर दिखाई दे रहा है। उनका कहना है कि यदि समय रहते गांव में स्वास्थ्य शिविर लगाया जाता तो स्थिति को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता था। वहीं, ग्रामीणों के बीच बीमारी को लेकर अलग-अलग तरह की धारणाएं भी सामने आ रही हैं और कुछ लोग इलाज के बजाय झाड़-फूंक तथा पंडा-पुजारियों का सहारा ले रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की कोशिश है कि लोगों को समय पर चिकित्सा सुविधा मिले और बीमारी के कारणों की पहचान की जा सके।
दो दर्जन से ज्यादा बच्चे बीमार, इलाज जारी
फिलहाल क्षेत्र में दो दर्जन से अधिक बच्चों के बीमार होने की जानकारी सामने आई है। इनमें 4 वर्षीय सचिन, 6 वर्षीय पंचलाल, 4 वर्षीय प्रेम सिंह, 4 वर्षीय मिनीता और 5 वर्षीय देवसिंह समेत कई बच्चे शामिल हैं। इनका स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पताल में उपचार किया जा रहा है। सीएमएचओ डॉ. परेश उपलव के अनुसार गांवों में स्वास्थ्य शिविर लगाकर इलाज किया जा रहा है और मौतों से जुड़ी जानकारी के साथ बीमारी के कारणों का भी पता लगाया जा रहा है। अब स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट से ही स्पष्ट होगा कि बीमारी की असल वजह क्या है और ग्रामीणों की ओर से किए गए मौतों के दावे की वास्तविक स्थिति क्या है।