Things Not to Keep in Balcony: घर की बालकनी सिर्फ बैठने या बाहर का नजारा देखने की जगह नहीं होती। कई घरों में लोग यहां पौधे, जूते-चप्पल, पुराना सामान और फर्नीचर तक रख देते हैं। हालांकि, वास्तु शास्त्र में बालकनी को लेकर भी कुछ नियम बताए गए हैं। वास्तु मान्यताओं के अनुसार, बालकनी में गलत चीजें रखने से घर की सकारात्मक ऊर्जा प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि यहां सामान रखते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी माना जाता है। अगर आपकी बालकनी भी पुराने या बेकार सामान से भरी रहती है, तो एक बार जरूर देख लें कि कहीं आप वास्तु से जुड़ी इन गलतियों को तो नहीं कर रहे।
कांटेदार पौधे लगाने से बचें
बालकनी को खूबसूरत बनाने के लिए लोग अलग-अलग तरह के पौधे लगाते हैं। इनमें कैक्टस और दूसरे कांटेदार पौधे भी शामिल होते हैं। लेकिन वास्तु मान्यताओं में कांटेदार पौधों को घर के लिए शुभ नहीं माना जाता। कहा जाता है कि इनकी वजह से घर का वातावरण प्रभावित हो सकता है और परिवार के सदस्यों के बीच तनाव बढ़ सकता है। बालकनी में तुलसी, मनी प्लांट जैसे पौधे लगाना बेहतर विकल्प माना जाता है।
जूते-चप्पल यहां रखने की न बनाएं आदत
कई लोग घर में जगह की कमी होने पर बालकनी में जूते-चप्पल या शू-रैक रख देते हैं। वास्तु के अनुसार ऐसा करने से बचना चाहिए। मान्यता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह में बाधा आ सकती है। साथ ही करियर और आर्थिक मामलों में अड़चन आने की बात भी कही जाती है।
टूटा सामान और कबाड़ तुरंत हटाएं
बालकनी में बेकार सामान जमा करके रखना आम बात है। पुरानी चीजें, टूटे गमले, खराब उपकरण या कबाड़ अगर लंबे समय तक यहां पड़ा रहे तो वास्तु के अनुसार इसे अच्छा नहीं माना जाता। ऐसी चीजों को नकारात्मकता से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए जो सामान इस्तेमाल में नहीं है, उसे बालकनी में जमा करने के बजाय हटा देना चाहिए।
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भारी फर्नीचर रखने से बचें
बालकनी में जरूरत से ज्यादा भारी सामान रखना भी वास्तु के हिसाब से उचित नहीं माना जाता। खासतौर पर उत्तर और पूर्व दिशा में भारी सोफा, टेबल या अन्य फर्नीचर रखने से बचने की सलाह दी जाती है। वास्तु मान्यताओं के मुताबिक इससे घर में धन से जुड़ी परेशानियां पैदा हो सकती हैं। इसलिए बालकनी को साफ-सुथरा और व्यवस्थित रखना बेहतर माना जाता है। इससे जगह भी खुली रहती है और घर का वातावरण भी अच्छा बना रहता है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. loksatya इसकी पुष्टि नहीं करता है।