नेपाल की राजनीति में इन दिनों एक नया अध्याय लिखा जा रहा है, जहां प्रधानमंत्री बने बालेन शाह ने शपथ लेने के महज 48 घंटों के भीतर ऐसे फैसले लिए, जिनसे पूरा सिस्टम हिल गया। उनकी तेज़ और आक्रामक कार्यशैली की तुलना बॉलीवुड फिल्म नायक के किरदार से की जा रही है, जिसे अनिल कपूर ने निभाया था। सवाल अब यही है—क्या ये रफ्तार कायम रहेगी?
Gen-Z आंदोलन पर सख्त एक्शन
शपथ लेते ही बालेन शाह ने सबसे बड़ा फैसला Gen-Z आंदोलन से जुड़े मामलों पर लिया। आयोग की रिपोर्ट के आधार पर पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री को जिम्मेदार मानते हुए कार्रवाई की गई। कुछ ही घंटों में दोनों नेताओं को जेल भेज दिया गया। इस कदम से देशभर में हलचल मच गई और सरकार की मंशा साफ दिखी कि अब जवाबदेही तय होगी।
शहीद परिवारों को सरकारी नौकरी
सरकार ने दूसरा बड़ा फैसला लेते हुए आंदोलन में जान गंवाने वाले 27 छात्रों के परिवारों को तुरंत सरकारी नौकरी देने का ऐलान किया। बालेन शाह ने इसे “कर्ज चुकाने” जैसा बताया। इस फैसले ने युवाओं और आम जनता के बीच सरकार की सकारात्मक छवि को और मजबूत किया।
100 दिन का सुधार प्लान लागू
बालेन शाह ने सभी मंत्रालयों को 100 दिनों के भीतर ठोस बदलाव दिखाने का लक्ष्य दिया है। हर विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि काम जमीन पर दिखना चाहिए। साथ ही पारदर्शिता बढ़ाने के लिए शिक्षा मंत्री को सरकारी प्रवक्ता बनाया गया, ताकि जनता तक हर जानकारी सीधे पहुंचे।
शिक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव
शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़ा सुधार किया गया। स्कूल और विश्वविद्यालयों में राजनीतिक छात्र संगठनों पर पूरी तरह रोक लगा दी गई। पांचवीं कक्षा तक बोर्ड परीक्षाएं खत्म करने और विदेशी नाम वाले स्कूलों के नाम बदलने का आदेश भी जारी हुआ। सरकार का कहना है कि शिक्षा को राजनीति से मुक्त करना जरूरी है।
भारत के साथ रिश्तों पर संतुलित संकेत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बधाई संदेश का जवाब देते हुए बालेन शाह ने सहयोग और विकास की बात कही। इससे साफ है कि वे पड़ोसी देशों के साथ संतुलन बनाए रखते हुए देश के अंदर बड़े बदलाव पर फोकस कर रहे हैं।