बलूचिस्तान में नागरिकों के खिलाफ हिंसा जारी रहने के बीच प्रमुख मानवाधिकार संगठनों ने एक व्यक्ति की कथित गैर-न्यायिक हत्या और दो महिलाओं के जबरन गायब किए जाने के मामले उठाए हैं। इन घटनाओं के लिए पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर आरोप लगाए गए हैं। बलूचिस्तान मानवाधिकार परिषद (एचआरसीबी) ने बताया कि केच जिले के तुंप क्षेत्र निवासी आमिर नूर को 28 अप्रैल को पाकिस्तान समर्थित डेथ स्क्वॉड ने गोली मार दी। वह अपनी पत्नी और बहन के साथ इलाज के लिए कराची जा रहे थे।
24 अप्रैल 2026 को रिहा किया गया था
संगठन के अनुसार रास्ते में बस को रोककर हथियारबंद लोगों ने आमिर नूर को नीचे उतारा और उन पर गोलीबारी कर दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इस हमले में उनकी पत्नी और बहन भी घायल हुईं। एचआरसीबी ने दावा किया कि आमिर नूर को 4 नवंबर 2024 को पाकिस्तानी बलों ने जबरन हिरासत में लिया था और लंबे समय तक बंदी बनाए रखने के बाद 24 अप्रैल 2026 को रिहा किया गया था।
11 लोगों को जबरन गायब किया
मानवाधिकार संगठन ने चिंता जताते हुए कहा कि जनवरी 2025 से अप्रैल 2026 के बीच 11 लोगों को जबरन गायब किए जाने के बाद रिहाई मिलने पर निशाना बनाया गया। इनमें से 10 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि एक व्यक्ति हमले में बच गया। संगठन ने कहा कि इन घटनाओं को स्थानीय डेथ स्क्वॉड ने अंजाम दिया, जिससे रिहाई के बाद भी लगातार उत्पीड़न को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं।
पाकिस्तानी बलों ने हिरासत में ले लिया
वहीं बलूच महिला फोरम (बीडब्ल्यूएफ) ने बलूचिस्तान में महिलाओं के जबरन गायब किए जाने की लगातार मिल रही खबरों पर गंभीर चिंता जताई है। संगठन ने कहा कि इससे लोगों में डर, अनिश्चितता और मानसिक तनाव बढ़ा है। फोरम ने हालिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि केच जिले के तेजाबान इलाके में मंगलवार देर रात छापेमारी के दौरान दो बलूच महिलाओं- जुबैदा और उनकी बहू जरनाज को पाकिस्तानी बलों ने हिरासत में ले लिया। तब से उनका कोई पता नहीं चल सका है।