बांग्लादेश क्रिकेट में इस समय बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। टी20I कप्तान लिटन दास ने खुलासा किया है कि खिलाड़ियों को टीम से बाहर किया जा रहा है, लेकिन इसकी जानकारी न उन्हें दी जाती है और न ही कोच फिल सिमंस को। मामला तब बढ़ा जब पहले दो टी20 मैचों के लिए शमीम हुसैन को अचानक टीम से बाहर कर दिया गया। लिटन दास ने कहा कि उन्हें इस फैसले की कोई खबर नहीं थी और यह साफ दिखाता है कि कप्तान का चयन प्रक्रिया में बेहद कम रोल रह गया है। हाल ही में महिला टीम की खिलाड़ी ने बोर्ड पर गंभीर आरोप लगाए थे और अब पुरुष टीम में भी असंतोष दिखने लगा है।
शमीम हुसैन को हटाने पर भड़के लिटन दास
लिटन दास ने कहा कि वे चाहते थे कि शमीम हुसैन टीम में रहें, क्योंकि उन्होंने कई सीरीज में बढ़िया प्रदर्शन किया है। उन्होंने बताया कि न उन्हें और न ही कोच को खिलाड़ियों की एंट्री या एग्जिट के बारे में बताया जाता है। लिटन ने कहा कि कप्तान होने के बावजूद उनकी कोई राय नहीं मानी जाती। कप्तान ने कहा कि वे खिलाड़ियों से माफी मांगने की स्थिति में हैं, क्योंकि वे चाहकर भी उन्हें सपोर्ट नहीं कर पा रहे। उनका मानना है कि ऐसी स्थिति में टीम बनाने के लंबे-अवधि प्लान पर असर पड़ेगा।
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टीम चयन में ‘कम बोलने’ की सलाह?
लिटन दास ने यह भी बताया कि बोर्ड और सिलेक्शन पैनल ने साफ कहा है कि चयन पूरी तरह उनका अधिकार है और कप्तान को सिर्फ दी गई टीम के साथ प्रदर्शन करना होगा। लिटन ने कहा कि यह पहली बार है जब उन्हें बताया गया कि टीम प्लानिंग में उनका रोल बेहद सीमित है। हालांकि वे कप्तानी छोड़ने के मूड में नहीं हैं, लेकिन उन्होंने कहा कि कप्तान और कोच को जानकारी देना जरूरी है, वरना भविष्य में वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में दिक्कतें आ सकती हैं।
चीफ सेलेक्टर का पलटवार
इस विवाद पर बांग्लादेश के चीफ सेलेक्टर गाजी अशरफ ने जवाब देते हुए कहा कि चयनकर्ता कप्तान और कोच की राय जरूर सुनते हैं, लेकिन अंतिम फैसला उनका होता है। उन्होंने दावा किया कि स्क्वॉड घोषित करने से पहले लिटन दास और कोच के साथ बैठक हुई थी। चयनकर्ताओं के अनुसार, शमीम ने हाल के मैचों में कम रन बनाए थे, इसलिए पहले दो टी20 के लिए उन्हें बाहर किया गया है। उन्होंने साफ कहा कि चयनकर्ताओं को हर बात पर कप्तान से अनुमति लेने की जरूरत नहीं है और वे सीधे बोर्ड को जवाबदेह हैं।